‘छोटा मटका’ बाघ केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अब गोरेवाड़ा की तर्ज पर ताडोबा में बनेगा रेस्क्यू सेंटर
Tadoba Rescue Center: हाई कोर्ट का बड़ा आदेश। ताडोबा में बनेगा वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर। 'छोटा मटका' बाघ के इलाज में हुई देरी के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा।
- Written By: प्रिया जैस
ताडोबा में बनेगा रेस्क्यू सेंटर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Gorewada Rescue Center: नागपुर में ‘छोटा मटका’ नामक बाघ के इलाज में हुई लापरवाही को लेकर छपीं खबरों पर स्वयं संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था। इस पर बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के लिए एक नया रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने के संबंध में अहम निर्देश दिए।
कोर्ट ने राज्य के प्रधान सचिव को इस मामले में पहल करते हुए सर्वोच्च न्यायालय से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने का आदेश दिया। अदालत मित्र सांबरे ने गोरेवाड़ा की तर्ज पर ताडोबा में भी एक रेस्क्यू सेंटर (Rescue Center) की आवश्यकता को रेखांकित किया था। इस पर संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने राज्य सरकार को 2 सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में आवेदन करने का निर्देश दिया।
SC की पूर्व अनुमति अनिवार्य
उल्लेखनीय कि किसी भी संरक्षित अभयारण्य या बाघ परियोजना क्षेत्र में निर्माण कार्य के लिए सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। इस मामले के लंबित होने के कारण अनुमति प्राप्त करने की पूरी जिम्मेदारी राज्य के प्रधान सचिव को सौंपी गई है।
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ताडोबा में इस रेस्क्यू सेंटर (Rescue Center) का निर्माण ‘फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ महाराष्ट्र’ (एफडीसीएम) द्वारा किया जाएगा। न्यायालय ने एफडीसीएम को निर्देश दिया है कि वह आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने के लिए प्रधान सचिव के स्तर पर लगातार फॉलो-अप करे।
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गोरेवाड़ा में चल रहा है ‘छोटा मटका’ का इलाज
ताडोबा के बफर जोन में वर्चस्व रखने वाले ‘छोटा मटका’ बाघ का बुद्ध पूर्णिमा के दिन ‘ब्रह्मा’ नामक बाघ के साथ हिंसक संघर्ष हुआ था। इस खूनी लड़ाई में ब्रह्मा की मौत हो गई थी, जबकि छोटा मटका गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसके पैर की हड्डी टूट गई थी।
जब उसके लंगड़ाकर चलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब न्यायालय ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया। शुरुआत में बाघ का इलाज चंद्रपुर में ही किया जा रहा था, लेकिन बाद में बेहतर इलाज के लिए उसे गोरेवाड़ा रेस्क्यू सेंटर में स्थानांतरित किया गया।
