

Nashik Environmental Protest: नासिक गंगापुर रोड क्षेत्र में लगभग 200 से 250 वर्ष पुराने दो विशाल पीपल के पेड़ों की कटाई को लेकर सोमवार को शहर में रणक्षेत्र जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
पेड़ कटाई के समर्थन और विरोध में अलग-अलग गुटों द्वारा किए गए प्रदर्शनों के कारण यह मुख्य मार्ग दिनभर तनाव का केंद्र बना रहा, प्रशासन की इस कार्रवाई पर पर्यावरण प्रेमियों ने कड़ा रोष व्यक्त किया है।
सुबह से ही गंगापुर रोड पर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पेड़ों को शहर की 'प्राकृतिक धरोहर बताते हुए कटाई तत्काल रोकने की मांग की।
नारेबाजी कर रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और 17 आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया। दूसरी ओर, स्थानीय व्यापारियों और कुछ नागरिकों ने सड़क चौड़ीकरण को समय की मांग बताया।
उनका तर्क था कि बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए विकास कार्यों में पेड़ों की कटाई अनिवार्य है। एक ही स्थान पर समर्थक और विरोधी गुटों के आमने-सामने आने से स्थिति काफी संवेदनशील हो गई, जिसे देखते हुए भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया।
प्रशासन ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के तहत ही यह निर्णय लिया गया है, गंगापुर रोड पर ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए सड़क का विस्तार किया जा रहा है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि वैकल्पिक उपायों (जैसे ट्री ट्रांसप्लटिशन) पर विचार किए बिना ही सदियों पुराने पेड़ों को काट दिया गया। उन्होंने इस मामले में तकनीकी समिति से पुनर्विचार की मांग की है। जब विरोध कर रहे लोगों ने कटर मशीनों के आगे खड़े होकर काम रोकने का प्रयास किया, तब पुलिस ने उन्हें जबरन मौके से हटा दिया।
पेड़ कटाई विरोधी इस मुहिम में राजू देसले, तलहा शेख, मनीष बाविस्कर, पंकज जाथय, यामिनी भहारी, गौरव देशमुख, आनंदिता कस्दीवाल, निकिता जंगीड, साहिल गुजर, संध्या बस्ते, सुप्रिया लोणारी, अलका असरेकर और प्रवीण शिलावट सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी शामिल रहे।
प्रशासन ने दावा किया है कि वे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे है, लेकिन 250 साल पुराने पेड़ों की बलि ने शहर में एक नई बहस छेड़ दी है।
वजह से अब तक 35 बेगुनाह लोगों की जान जा चुकी है। इस रोड पर करीब 400 पेड़ है जो एक्सीडेंट का कारण बनते है और चौड़ीकरण में रुकावट डालते हैं। हालाकि, जरूरी 40 पेड़ों को उखाड़ दिया जाएगा और बाकी पेड़ों को बचा लिया जाएगा।
- सुपरिटेंडेंट, विवेक भदाने