Nikay Chunav: नाम वापसी के लिए साम-दाम-दंड की नीति, बागियों को खुली धमकी, जानें पूरी इनसाइड स्टोरी

Political Threats Allegations: निकाय चुनाव में भाजपा-कांग्रेस सहित सभी दल बागियों को मनाने में जुटे। नाम वापसी की अंतिम तिथि 21 नवंबर से पहले साम-दाम-दंड-भेद की राजनीति तेज।
Political Threats Allegations: निकाय चुनाव में भाजपा-कांग्रेस सहित सभी दल बागियों को मनाने में जुटे। नाम वापसी की अंतिम तिथि 21 नवंबर से पहले साम-दाम-दंड-भेद की राजनीति तेज।
निकाय चुनाव (फाइल फोटो)
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Nagpur Local Body Elections: स्थानीय निकाय चुनाव के पहले चरण में होने वाले नगर परिषद व नगर पंचायत चुनाव के लिए नगराध्यक्ष और सदस्यों ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। कुछ नगर परिषद व नगर पंचायत में अध्यक्ष पद के लिए 10 से ऊपर उम्मीदवार हैं। पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के कामठी नपं में सर्वाधिक 18 इच्छुकों ने नगराध्यक्ष के लिए नामांकन दर्ज किया है।

वहीं 186 सदस्य आवेदन की स्क्रूटनी के बाद बचे हैं। जिले में 15 नप व 12 नपं में 2 दिसंबर को मतदान होना है। लगभग सभी पार्टियों में इस बार बगावत कर पर्चा दाखिल करने वालों की संख्या भी अधिक है। खासकर भाजपा और कांग्रेस में तो बागियों ने आलानेताओं की नींद हराम कर रखी है। अब पार्टी नेताओं द्वारा बागियों से नाम वापसी के लिए समझाइश दी जा रही है।

लालच और धमकी दोनों

कुछ उम्मीदवारों ने तो बताया कि ऊपरी दबाव के साथ भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी देने का लालच भी दिया जा रहा है तो कहीं-कहीं धमकी-चमकी भी चल रही है। दरअसल, 21 नवंबर नाम वापसी की अंतिम तारीख है और 24 घंटों में अधिक से अधिक बागियों को चुपचाप बिठाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाई जा रही है। बता दें कि 27 नगराध्यक्ष पदों के लिए कुल 197 उम्मीदवार फिलहाल मैदान में हैं। 2344 सदस्य पद के लिए डटे हुए हैं। इनमें से कितने 21 नवंबर को नाम वापस लेंगे, यह देखने वाली बात होगी।

मैदान से नहीं हटने वाले

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही मुख्य पार्टियों के बागी उम्मीदवारों ने किसी भी सूरत में मैदान से नहीं हटने की चेतावनी देनी शुरू कर दी है। दोनों ही पार्टियों के निष्ठावान कार्यकर्ता अपने टिकट वितरणों में आयातितों को दी गई उम्मीदवारी से बहुत नाराज हैं। यह नजारा भाजपा में सर्वाधिक देखा जा रहा है। कांग्रेस में सुनील केदार गुट के विरोधी गुट बेहद नाराज है। हालांकि पालक मंत्री ने दावा किया है कि वे सभी बागियों से संवाद कर नामांकन वापसी का निवेदन करेंगे लेकिन कुछ जगहों पर यह संभव नहीं लग रहा है। खासकर उमरेड नगर परिषद में तो भाजपा के बागियों ने शिंदे सेना की टिकट पर मैदान में डटे रहने की बात कही है। सीनियर बीजेपी कार्यकर्ता दिलीप सोनटक्के के नेतृत्व में 5 पूर्व नगरसेवकों ने शिंदे सेना से दावेदारी कर दी है।

शिंदे सेना ने भाजपायियों को दी टिकट

सोनटक्के की पत्नी शालिनी सोनटक्के को शिंदे सेना ने नगराध्यक्ष की उम्मीदवारी दी है। 27 सदस्यों वाली नगरपालिका में शिंदे सेना ने 20 भाजपायियों को टिकट दी है। नाराज भाजपाइयों का कहना है कि नामांकन दाखिल करने की पूर्व रात को कांग्रेस के लोगों को बीजेपी में प्रवेश करवाया गया और दूसरे दिन उन्हें उम्मीदवारी दे दी गई।

भाजपा ने प्राजक्ता कारू और कांग्रेस ने सुरेखा रेवतकर को उतारा है। बागियों ने भाजपा जिलाध्यक्ष आनंद राऊत और पूर्व विधायक राजू पारवे पर टिकट बेचने तक का आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि वे इन नेताओं को चुनाव में सबक सिखाएंगे।

दबाव में छोटे दल

महायुति व मविआ में शामिल दलों में भाजपा और कांग्रेस ही जिले में ताकतवर हैं। दोनों गठबंधनों में शामिल शिवसेना व राकां के दोनों गुट अब अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। मविआ में शामिल राकां शरद पवार गुट के जिलाध्यक्ष प्रवीण कुंटे ने तो दावा किया है कि हमारे अधिकृत उम्मीदवारों को नाम वापसी के लिए भाजपा व कांग्रेस के नेता धमकियां देकर दबाव डाल रहे हैं। इस तरह की शिकायतें कामठी व रामटेक विधानसभा क्षेत्र से अधिक मिल रही हैं।

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