Nagpur Civic Polls :नागपुर के स्थानीय निकाय चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur Local Body Elections: लंबे समय बाद होने जा रहे स्थानीय निकाय चुनावों में प्रचार ने अब जोर पकड़ लिया है। इस बीच कुछ करोड़पति प्रत्याशियों का जलवा देखने लायक है। कई प्रभागों में पढ़े-लिखे प्रत्याशियों ने भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी में दो ऐसे प्रत्याशी हैं, जिन्होंने आय और संपत्ति के मामले में कई विधायकों को भी पीछे छोड़ दिया है। कांग्रेस की तुलना में इस बार भाजपा में अधिक करोड़पति प्रत्याशी देखने को मिल रहे हैं। यही वजह है कि स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
इस बार चुनावी मैदान में उतरे कई प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि चर्चा का विषय बनी हुई है। नामांकन पत्रों के साथ दाखिल शपथ-पत्रों के अनुसार, जहां कुछ प्रत्याशी करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक हैं, वहीं कई प्रत्याशी उच्च शिक्षित होने के बावजूद साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं।
चुनाव आयोग को सौंपे गए हलफनामों से पता चलता है कि नागपुर महानगर पालिका के कुछ प्रत्याशियों की कुल संपत्ति करोड़ों रुपये से भी अधिक है। आंकड़ों पर नजर डालें तो एक प्रत्याशी की संपत्ति 95 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जबकि दूसरे प्रत्याशी की संपत्ति 50 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
हालांकि यह संपत्ति पूरे परिवार की संयुक्त आय के आधार पर दर्शाई गई है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसमें संबंधित प्रत्याशियों की भी अहम भूमिका दिखाई देती है। करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद महानगर पालिका चुनाव के मैदान में उतरने से राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। इनमें से कई प्रत्याशी व्यवसाय, रियल एस्टेट और अन्य कारोबारी गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
प्रशासन द्वारा सार्वजनिक किए गए शपथ-पत्रों के अनुसार शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा वर्ग से जुड़े पढ़े-लिखे प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मतदाता केवल धनबल को ही नहीं, बल्कि शिक्षा, साफ-सुथरी छवि और स्थानीय मुद्दों की समझ को भी प्राथमिकता दे सकते हैं।
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कई शिक्षित प्रत्याशियों ने अपने चुनाव प्रचार में पारदर्शिता, डिजिटल सेवाएं, स्वच्छता, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। शहरी क्षेत्रों में जहां आर्थिक मजबूती अब भी अहम मानी जाती है, वहीं पढ़े-लिखे और युवा प्रत्याशियों को भी अच्छा समर्थन मिलता नजर आ रहा है। मतदाताओं का कहना है कि अब वे ऐसे जनप्रतिनिधि चाहते हैं जो योजनाओं को समझ सकें और सरकारी तंत्र से प्रभावी ढंग से काम करा सकें।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार सभी प्रत्याशियों के शपथ-पत्र सार्वजनिक कर दिए गए हैं, ताकि मतदाता सही जानकारी के आधार पर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इस बार स्थानीय निकाय चुनाव में धनबल और शिक्षा के बीच एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।