
Nagpur leopard sightings:नागपुर में शीत सत्र (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur Leopard Sightings: बीते दिनों शहर के विभिन्न इलाकों में तेंदुओं ने जमकर उत्पात मचाया था। पूर्व नागपुर अंतर्गत पारडी और भांडेवाड़ी क्षेत्रों में तेंदुओं का सर्वाधिक आतंक देखा गया। विधानमंडल के शीत सत्र के दौरान लगभग रोजाना ही तेंदुओं द्वारा उत्पात मचाने की घटनाएं सामने आ रही थीं। इस मुद्दे को लेकर विधानमंडल में भी खूब चर्चा हुई।
गौर करने वाली बात यह है कि सत्र की समाप्ति के बाद से तेंदुओं के शहर में दिखाई देने की कोई घटना सामने नहीं आई है। ऐसे में लोगों के बीच मजेदार चर्चाएं शुरू हो गई हैं। चर्चा यह है कि वन संरक्षण की मांग को लेकर तेंदुओं ने मंत्रिमंडल का ध्यान आकर्षित करने के लिए शहर में आतंक मचाया था।
हालांकि यह चर्चा हास्यास्पद जरूर है, लेकिन तथ्य यह है कि विधानमंडल का सत्र खत्म होने के बाद से तेंदुओं के देखे जाने की घटनाएं सामने नहीं आई हैं। तेंदुओं का शहर से गायब होना नागरिकों के लिए बड़ी राहत की बात है, लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि पारडी, भांडेवाड़ी और पीली नदी सहित आसपास के इलाकों में घूम रहे तेंदुओं को वन विभाग ने पूरी तरह पकड़ा नहीं, तो वे आखिर गए कहां?
स्थानीय नागरिकों के अनुसार पारडी और भांडेवाड़ी से सटा झुड़पी जंगल तेंदुओं की गतिविधियों का मुख्य क्षेत्र है। लोगों का कहना है कि यहीं से तेंदुए शहर में प्रवेश करते थे। नागरिकों का दावा है कि उक्त क्षेत्र में कुल चार तेंदुए घूम रहे थे।
हालांकि भांडेवाड़ी और पारडी में हुई घटनाओं के बाद वन विभाग ने दो तेंदुओं को पकड़ लिया था, लेकिन शेष दो तेंदुओं के आसपास के इलाकों में देखे जाने का दावा किया गया। इससे जुड़े वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुए थे। फिलहाल शहर तेंदुआ संकट से मुक्त नजर आ रहा है।
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शहर में जंगली बिल्लियों का नहीं होना निश्चित रूप से नागरिकों के लिए राहत की बात है, लेकिन इस स्थिति को बनाए रखने के लिए वन विभाग को पूरी सतर्कता बरतनी होगी। यदि कार्यप्रणाली में कोई ढील नहीं दी गई, तो तेंदुआ संकट से राहत बनी रह सकती है। लोगों की मांग है कि वन विभाग झुड़पी जंगल से सटे इलाकों में वाइल्डलाइफ मॉनिटरिंग और गश्त बढ़ाए, ताकि भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को रोका जा सके।






