नागपुर: भ्रष्टाचार के आरोपों पर सख्ती, भूमि अधिग्रहण सलाहकार का सेवा विस्तार प्रस्ताव रद्द

Nagpur Land Acquisition: नागपुर में भूमि अधिग्रहण सलाहकार को सेवा विस्तार देने का प्रस्ताव रद्द। भ्रष्टाचार के आरोपों पर स्थायी समिति में आपत्ति के बाद लिया गया फैसला।
Nagpur: Strict Action on Corruption Allegations; Proposal for Service Extension of Land Acquisition Advisor Cancelled
नागपुर भूमि अधिग्रहण,(प्रतिकात्मक तस्वीर, सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Consultant Controversy: नागपुर शहर में की स्वीकृत विकास योजना के तहत विभिन्न आरक्षणों और विकास योजना की सड़कों के लिए भूमि अधिग्रहण 6.43 का कार्य सुचारू रूप से लाख रुपये मानधन चलाने के लिए 'अनुबंध पर होने थे खर्च आधारित भूमि अधिग्रहण सलाहकार' प्रमोद गावंडे को 6 महीने का सेवा विस्तार देने प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से भले ही स्थायी समिति के समक्ष प्रस्ताव रखा गया हो, किंतु स्थायी समिति सदस्य वसीम खान द्वारा सलाहकार प्रमोद गावंडे की भ्रष्ट कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की गई। इस संदर्भ में हुई गंभीर चर्चा के बाद स्थायी समिति की सभापति शिवानी दानी ने प्रस्ताव को रद्द कर दिया जिससे अब भूमि अधिग्रहण सलाहकार का कार्यकाल नहीं बढ़ने की जानकारी भी उन्होंने दी।

सीधे साक्षात्कार के जरिए हुई थी नियुक्ति

दस्तावेजों के अनुसार सरकारी सेवा में भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत अनुभव रखने वाले अधिकारियों नियुक्ति के लिए मनपा द्वारा 12 सितंबर 2024 को विज्ञापन जारी किया गया था। इसके बाद चयन समिति द्वारा सीधे साक्षात्कार लेकर प्रमोद गावंडे का चयन किया गया था। महाराष्ट्र महानगर पालिका अधिनियम 53(3) के प्रावधानों के तहत शुरुआत में उन्हें 6 महीने के अनुबंध पर नियुक्त किया गया था और 26 सितंबर 2024 के बाद उन्होंने 3 अक्टूबर 2024 को मनपा के नगर रचना विभाग में कार्यभार ग्रहण किया था। समिति की बैठक में खान ने गंभीर अनियमितताओं के आरोपों से घिरे अधिकारी प्रमोद गावंडे को दी जाने वाली सेवा वृद्धि का विरोध किया।

निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर हो कार्रवाई

खान ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन का उपयोग केवल आवासीय था, वहां अवैध रूप से कमर्शियल बिल्डिंग और अस्पताल को मंजूरी दी गई, जमीन के क्षेत्रफल और FSI में हेरफेर कर बिल्डर को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, बिना ऑक्यूपेसी सर्टिफिकेट के बिल्डिंग में गतिविधियां जारी है।

यहां तक कि कोर्ट के आदेश और विधि विशेषज्ञों के राय की भी अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में दोषी अधिकारियों को संरक्षण देना न केवल प्रथासनिक नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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