किसानों को तकलीफ हुई तो चलेगा लेकिन उद्यमियों को बराबर मिलनी चाहिए बिजली, गुलाबराव पाटिल का विवादित बयान

Gulabrao Patil Controversial Statement On Electricity: जलगांव के पालक मंत्री गुलाबराव पाटिल के 'किसानों की परेशानी चलेगी, पर उद्योगपतियों को मिले बिजली' वाले बयान पर किसानों में गुस्सा।
Gulabrao Patil Controversial Statement On Electricity
पालक मंत्री गुलाबराव पाटिल के बयान पर सियासी भूचाल (फोटो क्रेडिट-X)
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Gulabrao Patil Controversial Statement: महाराष्ट्र के जलगांव जिले से एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। जलगांव के पालक मंत्री गुलाबराव पाटिल द्वारा बिजली आपूर्ति को लेकर दिए गए एक बयान पर किसानों और विपक्षी दलों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है।

मंत्री ने कहा था कि यदि किसानों को कुछ समय के लिए बिजली की परेशानी होती है, तो इसे बर्दाश्त किया जा सकता है, लेकिन औद्योगिक इकाइयों (उद्योगपतियों) को निर्बाध बिजली मिलनी चाहिए। पालक मंत्री का यह बयान सामने आने के बाद राज्यभर के कृषक वर्ग और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।

चिंचोली में ट्रांसफार्मर उद्घाटन के दौरान दिया था बयान

जलगांव तालुका के चिंचोली गांव में एक ट्रांसफार्मर के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान पालक मंत्री गुलाबराव पाटिल ने बिजली वितरण प्राथमिकताओं पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि हम उद्योगपतियों से यह नहीं कह सकते कि हमारे पास बिजली उपलब्ध नहीं है। यदि किसानों को थोड़ी बहुत परेशानी का सामना करना भी पड़े, तो उसे बर्दाश्त किया जा सकता है, लेकिन उद्योगों को प्राथमिकता के आधार पर बिजली मिलनी चाहिए।

मंत्री के इस दोहरे रवैये वाले बयान से स्थानीय किसानों में गहरी नाराजगी फैल गई है। किसानों का आरोप है कि सरकार ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों की उपेक्षा कर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का काम कर रही है।

जब भूखा रहना पड़ेगा तब किसानों का दर्द समझ आएगा

पालक मंत्री के इस बयान पर तीखा हमला बोलते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष रोहिणी खडसे ने कड़ी आपत्ति जताई है। रोहिणी खडसे ने कहा कि जब तक इन नेताओं को खुद भूखे रहने की नौबत नहीं आती, तब तक वे अन्नदाता किसानों की वास्तविक समस्याओं और तकलीफों को कभी नहीं समझ सकते। उन्होंने कहा कि किसानों के हक की बिजली काटकर उद्योगपतियों को देना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।