Gadchiroli Police Recruitment: नागपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, भर्ती में कॉमन मेरिट नहीं; आरक्षण नियम बरकरार

Gadchiroli Police Recruitment: नागपुर हाई कोर्ट ने गढ़चिरोली पुलिस भर्ती में याचिकाएं खारिज करते हुए कहा—खाली पद कॉमन मेरिट से नहीं, आरक्षण अनुपात से ही भरे जाएंगे।
Gadchiroli Police Recruitment: Nagpur High Court's Major Verdict — No Common Merit in Recruitment; Reservation Rules Upheld.
गढ़चिरोली पुलिस भर्ती,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Gadchiroli Police Recruitment NT Category: नागपुर हाई कोर्ट ने गढ़चिरोली पुलिस कांस्टेबल भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए उम्मीदवारों की रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायाधीश अनिल किलोर ने स्पष्ट किया है कि विमुक्त जाति और घुमंतु जनजाति (वीजे-एनटी) वर्ग के जो पद योग्य उम्मीदवारों के अभाव में खाली रह गए हैं। उन्हें अन्य उप-वर्गों (एनटी-बी और एनटी-सी) की 'कॉमन मेरिट लिस्ट' बनाकर नहीं भरा जा सकता।

इसके बजाय खाली पदों को उन वगर्गों के लिए निर्धारित 'आरक्षण प्रतिशत के अनुपात में ही भरा जाएगा। गड़चिरोली में पुलिस कांस्टेबल के 912 पदों पर भर्ती के लिए 5 मार्च 2024 को विज्ञापन जारी किया गया था। इस पूरी चयन प्रक्रिया के अंत में वीजे (ए) श्रेणी के 9 और एनटी (डी) श्रेणी के 40 पद (कुल 49 पद) योग्य उम्मीदवारों के न मिलने के कारण खाली रह गए थे।

कॉमन मेरिट लिस्ट से पद भरने की मांग

निखिल अशोक डुमाने, श्रुति माधव नन्हे, मंजूषा साईनाथ सादुलवार और अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग यह थी कि इन 49 खाली पदों को एनटी (बी) और एनटी (सी) श्रेणियों के उम्मीदवारों से केवल योग्यता के आधार पर 'कॉमन मेरिट लिस्ट' बनाकर भरा जाए। उन्होंने महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण, नागपुर के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें गृह विभाग की सलाह के अनुसार पदों को आरक्षण प्रतिशत के अनुपात में बांटने को सही ठहराया गया था।

अलग-अलग आरक्षण प्रतिशत तय

अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि महाराष्ट्र राज्य लोक सेवा (आरक्षण) अधिनियम 2001 की धारा 4(3) के तहत इन श्रेणियों के बीच पदों का स्थानांतरण तो संभव है लेकिन इसके मूल उद्देश्य को खत्म नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने फैसले में दर्ज किया कि वीजे-एनटी वर्ग को 4 अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है और सभी का आरक्षण प्रतिशत अलग-अलग है। बीजे (ए) के लिए 3%, एनटी (बी) के लिए 2.5%, एनटी (सी) के लिए 3.5% और एनटी (डी) के लिए 27%। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब अलग-अलग आरक्षण प्रतिशत तय किए गए हैं तो पदों को भरते समय उसी अनुपात का पालन किया जाना चाहिए।

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