रेत का खेल या फिर चुनावी गेम..., ED की एंट्री से राजनीतिक महकमे में मचा बवाल, 'टाइमिंग' पर उठे सवाल

ED Raid Nagpur: नागपुर में शुक्रवार को ED की रेड पड़ी। रेत का अवैध खेल या सियासी बिसात? 15 जनवरी को होने वाले मनपा चुनाव से पहले कद्दावर नेताओं के करीबियों पर गाज। यहाँ पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
ED Raid Nagpur Sand Smuggling Case 2026
नागपुर में रेड (सौजन्य-नवभारत और सोशल मीडिया)
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Sand Smuggling Case: नागपुर में महानगर पालिका का चुनाव हो रहा है और जिला परिषद के चुनाव होने वाले हैं। चुनावी मौसम में अचानक जिले में रेत ठेका व व्यवसाय से जुड़े अनेक लोगों पर ईडी की छापामारी से हड़कंप मच गया है। हड़कंप मचने का कारण भी यह है कि जिले के एक कद्दावर कांग्रेसी नेता के करीबियों के साथ ही शिवसेना उद्धव ठाकरे के एक प्रमुख पदाधिकारी पर यह कार्रवाई हुई है।

चुनावी मौसम में ईडी की एंट्री से राजनीतिक महकमे में यह कयास लगने शुरू हो गए हैं कि यह रेत का खेल है या फिर चुनावी गेम...! संदेह का कारण भी है। लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव के दौरान उस कांग्रेस नेता की वजनदारी खत्म करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए जा चुके हैं। जिला परिषद चुनाव के पूर्व भी उसी तरह का कोई खेल खेले जाने का संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

कुछ तो दबी जुबान आरोप भी लगा रहे हैं कि सत्ताधारियों ने फिर ईडी को हथियार बनाया है। इस कार्रवाई से एक सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर चुनाव से किसे डर है या फिर रेत के खेल में कौन क्या चाहता है। यह रहस्य तालों में कैद है।

करीबी ही रहे हैं निशाने पर

जिले में लंबे समय तक अपना दबदबा कायम रखने वाले कांग्रेस नेता के विधानसभा क्षेत्र सावनेर में ही ईडी ने अनेक लोगों के घरों, दफ्तरों पर छापा मारा। नागपुर शहर, कामठी व भोपाल में यह कार्रवाई एक साथ की गई। जिन पर कार्रवाई हुई वे कांग्रेसी नेता के करीबी बताये जा रहे हैं। मतलब निशाने पर वे ही हैं।

बता दें कि अपनी पार्टी का झंडा मोदी लहर में भी लहराने वाले इस नेता की वजनदारी जिले सहित शहर में भी बढ़ने लगी थी। यह विरोधी पक्ष के साथ उनकी ही पार्टी के कुछ लोगों को भी सहन नहीं हो रहा था। उनके पर कुतरने के लिए उनके साथियों को साम-दाम-दंड-भेद की नीति से तोड़ना शुरू किया गया।

लोस चुनाव में उनकी पसंद के उम्मीदवार की राह में कई तरह के रोड़ लगाए गए। विस चुनाव में उनके पुराने मामले को उखाड़ा गया और वे चुनाव लड़ने से वंचित रहे। उनके परिवार के सदस्य को पराजय का सामना करना पड़ा। फिर उनके करीबी जिप अध्यक्ष के पति का फ्रॉड केस निकाला गया। वे जमानत पर हैं।

यह कहा जाता है कि उनके राइट हैंड समझे जाने वाले पूर्व पदाधिकारी को रेत मामले में ही फंसाने का भय बताकर तोड़ा गया। दरअसल, इस एक नेता के दबदबे को खत्म करने के लिए सारे षड्यंत्र किये गए। ऐसे में जब अब उनके करीबियों पर ईडी की कार्रवाई ऐन जिला परिषद चुनाव के पहले हुई है तो इसमें भी राजनीतिक षड्यंत्र होने का संदेह जताया जा रहा है।

यूबीटी को भी घेरा

ईडी की इस छापामारी का शिकार हुए लोगों में एक उद्धव ठाकरे शिवसेना का जिला पदाधिकारी भी शामिल है। जानकारी मिली है कि उसने हाल ही में सावनेर में करीब 35 करोड़ रुपये का रेत घाट का ठेका लिया है। चर्चा है कि राजनीतिक महकमे के जिन प्रभावी लोगों को यह ठेका नहीं मिला उनके पेट का दर्द बढ़ गया था। चुनावी मौसम में इस छापामारी से ऐसे लोगों को दोहरा लाभ मिल सकता है।

यह भी बता दें कि सरकार ने रेत माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिये थे। अभी जिन पर ईडी के छापे पड़े हैं, तत्कालीन पुलिस आयुक्त के समय इन लोगों पर पुलिस ने बोगस रायल्टी व रेत चोरी के मामले में कार्रवाई की थी। ऐसे 11 लोगों पर मामला दर्ज कर पुलिस ने पूछताछ की थी।

सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ था। उसी आधार पर अब ईडी ने इन लोगों पर छापा मारा है और जांच की जा रही है। चूंकि चुनावी मौसम है और अधिकतर एक विपक्षी पार्टी नेता के करीबी हैं, इसलिए कार्रवाई के समय व संबंध पर संदेह होना भी वाजिब ही है।

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