

Sanjay Raut On Qurbani Controversy: महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति, विशेषकर धार्मिक राजनीति और बकरीद पर कुर्बानी की परंपरा पर संजय राउत ने एक तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संजय राउत का आरोप है कि सरकार और बीएमसी जानबूझकर धर्म की राजनीति कर रहे हैं ताकि समाज में विभाजन पैदा किया जा सके।
उनके अनुसार, आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए जानबूझकर तनाव का माहौल बनाया जा रहा है, जिससे दो समुदायों के बीच दंगे जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा है।
कुर्बानी के विषय पर मीडिया से बोलते हुए, संजय राउत ने धार्मिक अनुष्ठानों में दी जाने वाली पशु बलि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कामाख्या देवी मंदिर का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि वहां भी बड़ी संख्या में भैंसों की बलि दी जाती है। उनका मुख्य विरोध इस बात पर है कि समाज और राजनीति का एक हिस्सा कुछ प्रकार की कुर्बानियों को तो स्वीकार करता है, लेकिन दूसरों की कुर्बानी पर सवाल उठाता है।
संजय राउत ने अपनी बात को क्षेत्रीय और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि है और वे स्वयं को क्षत्रिय और मराठा पहचान से जोड़ते हैं। उनके अनुसार, महाराष्ट्र एक मांसाहारी समाज है और कुर्बानी देना उनकी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा है, जिसे वे जारी रखेंगे।
अंत में, संजय राउत ने कुर्बानी शब्द के अर्थ को व्यापक बनाते हुए इसे देशभक्ति और राष्ट्र रक्षा से जोड़ा है। धार्मिक त्योहारों या रावाजों को अलग मोड देते हुए राउत ने आगे कहा कि, बलिदान देश के अस्तित्व के लिए भी आवश्यक है। उनका तर्क है कि यदि लोग देश और राज्य के लिए बलिदान देना बंद कर देंगे, तो महाराष्ट्र और भारत को बचा पाना असंभव होगा। कुल मिलाकर, संजय राउत धार्मिक प्रथाओं को राजनीतिक चश्मे से देखने का विरोध करते है और इसे मराठा पहचान तथा राष्ट्रवाद के एक अभिन्न अंग के रूप में प्रस्तुत करते है।