Nagpur News: मुस्लिम लीग और एमआईएम की राहें अलग, सदन में दिखेगी अलग-अलग रणनीति

AIMIM Vs Muslim League: नागपुर महानगरपालिका में मुस्लिम लीग और एआईएमआईएम की राजनीतिक राहें अलग होती दिख रही हैं, जहां मुस्लिम लीग के सत्ता के करीब जाने की संभावना है।
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AIMIM Vs Muslim League (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nagpur Politics: मनपा चुनाव में पहली बार छह सीटें जीतकर एआईएमआईएम ने सभी को चौंका दिया है। वहीं मुस्लिम लीग ने भी मनपा में वापसी की है, लेकिन पूर्व अनुभवों को देखते हुए एक बार फिर उसके भाजपा को समर्थन देने की संभावना जताई जा रही है। इसके उलट, एआईएमआईएम ने सत्तापक्ष से दूरी बनाए रखने का स्पष्ट निर्णय लिया है। ऐसे में मनपा सदन में मुस्लिम समर्थक दोनों दलों की राजनीति अलग-अलग दिशा में जाती नजर आ सकती है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मुस्लिम लीग भले ही सत्तापक्ष के लिए बड़ी चुनौती न बने, लेकिन एआईएमआईएम विपक्षी बेंच पर बैठकर सत्तापक्ष को घेरने की रणनीति अपनाएगी। इससे सदन की कार्यवाही अधिक सक्रिय और टकरावपूर्ण होने की संभावना है।

मुस्लिम लीग का सत्ता की ओर झुकाव

इतिहास गवाह है कि मुस्लिम लीग विकास निधि और सत्ता में भागीदारी के लिए अक्सर सत्ताधारी दल के करीब रही है। वर्ष 2012 में लीग के तीन नगरसेवकों ने भाजपा को बाहर से समर्थन दिया था, जिसके बदले उन्हें स्थायी समिति में सदस्यता जैसे महत्वपूर्ण पद मिले थे। इस बार भी मुस्लिम लीग के चार नगरसेवक निर्वाचित हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष असलम खान मुल्ला के नेतृत्व में पार्टी एक बार फिर विकास कार्यों के नाम पर भाजपा को बाहर से समर्थन दे सकती है। हालांकि भाजपा के पास पूर्ण बहुमत होने से उसे किसी अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता नहीं है, जबकि कांग्रेस सीमित संख्या बल के कारण विपक्ष को मजबूत करने की कोशिश में है।

एमआईएम की स्वतंत्र पहचान की कोशिश

दूसरी ओर एआईएमआईएम ने स्पष्ट किया है कि वह भाजपा या कांग्रेस, किसी के भी साथ नहीं जाएगी। पार्टी पर लंबे समय से भाजपा या कांग्रेस की ‘बी-टीम’ होने के आरोप लगते रहे हैं। इसी छवि को तोड़ने के लिए एआईएमआईएम ने सदन में स्वतंत्र और आक्रामक भूमिका निभाने की तैयारी की है।

पार्टी के नगरसेवकों को वरिष्ठ नेताओं द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे स्थानीय और जनहित के मुद्दों पर तथ्यपूर्ण और प्रभावी ढंग से अपनी बात रख सकें। दोनों दलों के नगरसेवकों पर मतदाताओं का दबाव भी है। प्रभाग 6 में मुस्लिम लीग और प्रभाग 3 में एआईएमआईएम को मुस्लिम और दलित मतदाताओं का संयुक्त समर्थन मिला है। ऐसे में नगरसेवकों के लिए यह जरूरी होगा कि वे केवल समुदाय आधारित राजनीति तक सीमित न रहकर सर्वसमाज के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाएं।

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