नागपुर मनपा स्कूलों में शिक्षा संकट गहराया, 18 में से 13 स्कूलों में प्रभारी मुख्याध्यापक; व्यवस्था चरमराई

Nagpur Municipal Schools: नागपुर मनपा के 18 माध्यमिक स्कूलों में से केवल 5 में नियमित मुख्याध्यापक हैं। प्रभारी व्यवस्था के चलते स्कूलों में गुणवत्ता गिर रही है और छात्रों की संख्या कम हो रही है।
Education Crisis Deepens in Nagpur Municipal Schools: 13 Out of 18 Schools Headed by Acting Principals; System Collapses.
नागपुर मनपा स्कूल, शिक्षा संकट,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Schools Administration Problem: नागपुर महानगरपालिका के शिक्षा विभाग की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है। 'प्रभारी' राज, शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण मनपा के माध्यमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या तेजी से घट रही है जिससे कई स्कूलों के हमेशा के लिए बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मनपा के कुल 18 माध्यमिक स्कूलों में से केवल 5 में ही नियमित मुख्याध्यापक कार्यरत हैं।

शेष 13 स्कूलों का पूरा कामकाज 'प्रभारी मुख्याध्यापकों' के कंधों पर है। नियमित मुख्याध्यापकों के न होने से प्रवेश अभियानों और गुणवत्ता सुधार के कार्यक्रमों पर ब्रेक लग गया है। प्रभारी मुख्याध्यापकों के पास नीतिगत और आर्थिक निर्णय लेने का अधिकार नहीं होता है।

इसके अलावा, उन पर अध्यापन के साथ-साथ पूरे स्कूल का प्रशासनिक भार भी होता है। जिससे कक्षाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता और परेशान होकर अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव और गिरता परिणाम

मनपा के अधिकांश स्कूल हिंदी या मराठी माध्यम के हैं, जबकि अभिभावकों का रुझान अंग्रेजी माध्यम की ओर है। मनपा के पास केवल 2 अंग्रेजी माध्यम के स्कूल हैं। इन स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम, स्वच्छ शौचालय और खेल के मैदान जैसी बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है, जिसके कारण ये निजी स्कूलों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों के शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं जिसका नतीजा यह है कि 10वीं कक्षा का परिणाम गिरकर मात्र 32 प्रतिशत रह गया है, वर्ष 2011 में मनपा के 24 माध्यमिक स्कूल हुआ करते थे, जो 2026 आते-आते मात्र 18 रह गए हैं। शिक्षाविदों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो मनपा के माध्यमिक स्कूल जल्द ही इतिहास बन जाएंगे।

विपक्ष का आरोप: निजीकरण की हो रही है साजिश

नागपुर मनपा ने छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए 'प्रवेश रथ' और 'स्कूल दत्तक योजना' जैसी कई योजनाएं चलाई लेकिन ये सभी बेअसर साबित हुई। विपक्ष का आरोप है कि मनपा जानबूझकर स्कूलों को बंद करवा रही है। आरोप है कि स्कूलों की इमारतें खाली करवाकर उन्हें निजी संस्थाओं को किराये पर देने की साजिश रची जा रही है और गरीब बच्चों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

घटती छात्र संख्या और स्कूलों पर लटकती तलवार

प्रभारी राज और सुविधाओं की कमी का सीधा असर स्कूलों की छात्र संख्या (पटसंख्या) पर पड़ा है। पिछले 5 वर्षों में मनपा को छात्रों की कमी के कारण 3 माध्यमिक स्कूल हमेशा के लिए बंद करने पड़े है।

वर्तमान स्थिति और भी विताजनक है, 13 प्रभारी वाले स्कूलों में से 6 स्कूलों में छात्रों की संख्या 20 से भी कम रह गई है और 3 रकूलों में तो 10वीं और 12वीं की कक्षाओं में केवल 5 से 7 छात्र ही बचे हैं।

सरकारी नियमानुसार, यदि किसी कक्षा में कम से कम 20 छात्र और पूरे स्कूल में 60 से कम छात्र लगातार 3 साल तक रहते हैं, वो स्कूल को बंद करने का प्रावधान है। मनपा के 6 स्कूल इस मापदंड के दायरे में आ चुके हैं और उन पर कभी भी ताला लग सकता है।

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