टीचर हैं या डेटा एंट्री ऑपरेटर?' 51 ऐप्स और 91 कामों के बोझ तले दबी महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था

Teacher Data Entry Burden Maharashtra: शिक्षक अब सिर्फ डेटा भरेंगे? महाराष्ट्र में 51 ऐप्स और 91 तरह के कामों के बोझ तले दबे शिक्षक। पारशिवनी में निजी स्वार्थ साधने वाले शिक्षकों पर भी सवाल।
Over 91 non-academic tasks and 51+ apps are crushing Maharashtra teachers.
शिक्षकों पर बोझ (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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51+ Apps for Teachers: शिक्षा देना जहां शिक्षक का मूल दायित्व है, वहीं आज जिप, नगरपालिका और निजी स्कूलों के शिक्षक डिजिटल कागजी कार्रवाई के जाल में पूरी तरह फंस गए हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि शिक्षकों को पढ़ाने से ज्यादा समय डेटा भरने में लगाना पड़ रहा है। तीन-चार नहीं, बल्कि 51 से अधिक ऐप्स और वेबसाइट्स पर अलग-अलग प्रकार की जानकारी भरने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डाल दी गई है।

इसके अलावा 40 से अधिक अन्य ऑनलाइन और गैर-शैक्षणिक कार्य, यानी कुल मिलाकर 91 तरह के कार्यों का भार शिक्षकों पर लादा गया है। इसी से आक्रोशित होकर शिक्षकों ने सवाल उठाया है। 'क्या हम शिक्षक हैं या डेटा एंट्री ऑपरेटर?'

शिक्षकों पर कामों का बोझ

शिक्षक बताते हैं कि विद्यार्थियों की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन, शैक्षणिक प्रगति, छात्रवृत्ति, क्रीड़ा, स्वास्थ्य, पौधारोपण, चुनाव प्रक्रिया, सामाजिक उपक्रम, डिजिटल प्रशिक्षण जैसी असंख्य योजनाओं के लिए अलग-अलग ऐप्स मौजूद हैं। पीएम पोषण, स्विफ्टचेंट, विद्यांजली, निपुण महाराष्ट्र, दीक्षा, फिरकी, आईगॉट कर्मयोगी, सरल के 12 से अधिक मॉड्यूल, यू-डायस प्लस के विभिन्न सेक्शन, शालार्थ, महाडीबीटी, पीएफएमएस, डिजिलॉकर, बीएलओ, मतदाता सहायता, फिट इंडिया, खेलो इंडिया, पीएम श्री स्कूल, नवोदय, एनएमएमएस छात्रवृत्ति, ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे कार्यक्रमों की जानकारी अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भरनी पड़ती है।

हर एप के लिए अलग लॉग-इन, अलग पासवर्ड

प्रत्येक एप के लिए अलग पंजीकरण, अलग लॉग-इन, अलग पासवर्ड और अलग-अलग अंतिम तिथियां होने के कारण शिक्षक पूरी तरह भ्रमित हो चुके हैं। शिक्षकों का कहना है कि, सुबह स्कूल, दोपहर में अध्यापन, शाम को कागजी काम और रात में मोबाइल पर डेटा एंट्री यही उनकी दिनचर्या बन गई है। कई बार एक ही जानकारी बार-बार अलग-अलग ऐप्स में भरनी पड़ती है, जिससे मानसिक और शारीरिक तनाव बढ़ रहा है।

ग्रामीण स्कूलों की स्थिति और भी दयनीय

ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमजोर सुविधा के बावजूद 'तत्काल जानकारी अपलोड करें' जैसे आदेश दिए जाते हैं। नेटवर्क की समस्या, सर्वर डाउन, डेटा सेव न होना इन तकनीकी दिक्कतों से शिक्षक रोज जूझ रहे हैं।

निजी काम करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई होगी?

पारशिवनी पंस अंतर्गत जिप की प्राथमिक शालाओं में कार्यरत कुछ शिक्षक ‘ग्राहक पंचायत’ के नाम पर निजी स्वार्थ साधते हुए दिखाई दे रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसे शिक्षकों पर प्रशासन कार्रवाई करेगा? बताया जा रहा है कि पारशिवनी में कार्यरत रहते हुए विवादों में घिरे। कुछ शिक्षक निलंबन के बाद अन्य पंचायत समितियों में भेजे गए, लेकिन बाद में प्रशासनिक तबादलों के जरिए वे फिर से पारशिवनी पंचायत समिति में लौट आए। ऐसे विवादास्पद शिक्षकों पर कड़ी निगरानी, समय-समय पर जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो।

शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न

शिक्षकों का साफ कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ेगा। अब सवाल यह है कि, क्या शिक्षक बच्चों का भविष्य गढ़ेंगे या सिर्फ ऐप्स में डेटा भरते रहेंगे?

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