बड़ी खबर: महाराष्ट्र में नहीं बढ़ेंगे प्रॉपर्टी के दाम! सरकार ने रेडी रेकनर दरों को रखा स्थिर, घर खरीदना अब आसान
Maharashtra Ready Reckoner Rates: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला। वर्ष 2026-27 के लिए रेडी रेकनर दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं। घर खरीदारों और बिल्डरों को मिली बड़ी राहत। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
- Written By: प्रिया जैस
घर खरीदना हुआ आसान (AI Generated Image)
Real Estate Relief Maharashtra: राज्य सरकार ने आगामी वर्ष 2026-2027 के लिए वार्षिक मूल्य दर (एनुअल स्टेटमेंट ऑफ रेट्स – एएसआर) यानी रेडी रेकनर दरों को स्थिर रखने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। संपूर्ण राज्य में पिछले वर्ष (2025-26) की दरों को ही कायम रखा गया है जिसके परिणामस्वरूप दरों में बढ़ोतरी का प्रतिशत शून्य है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और निर्माण (कंस्ट्रक्शन) व्यवसाय में आई मंदी को ध्यान में रखते हुए ‘क्रेडाई’ सहित अन्य निर्माण व्यावसायिक संगठनों ने सरकार से वार्षिक मूल्य दरों को स्थिर रखने का अनुरोध किया था। सरकार ने इस विनती पर उचित विचार करते हुए यह राहत भरा फैसला लिया है।
मनपा टैक्स में भी नहीं होगी वृद्धि
जानकारों की मानें तो मनपा की नई कर प्रणाली के अनुसार रेडी रेकनर दरों के आधार पर सम्पत्तियों का टैक्स निर्धारित होता है। मनपा का बजट पेश करते समय रेडी रेकनर दरों में वृद्धि होने से टैक्स के माध्यम से मनपा की आय में भी वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा था।
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रेडी रेकनर दरों में वृद्धि होने से टैक्स के माध्यम से महंगाई के इस दौर में जनता की जेब पर बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी किंतु अब इन दरों को स्थिर रखे जाने के कारण जनता को भी राहत मिलने जा रही है।
पारदर्शी प्रक्रिया के तहत तय हुई दरें
इन दरों को अंतिम रूप देने से पहले व्यापक विचार-विमर्श किया गया। स्टाम्प कलेक्टर (मुद्रांक जिलाधिकारी) द्वारा जिलाधिकारी स्तर पर निर्माण पेशेवरों और दस्तावेज लेखकों के साथ बैठकें आयोजित की गईं। प्रक्रिया में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनके सुझावों और आपत्तियों पर विचार किया गया जिसके बाद ही इन दरों को प्रस्तावित किया गया।
नई वार्षिक मूल्य दर (ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए)
- दरें स्थिर : संपूर्ण राज्य में वर्ष 2025-26 की दरों को ही आगे (2026-27 के लिए) कायम रखा गया है।
- डीपी (डेवलपमेंट प्लान) का कार्यान्वयन : शहरी क्षेत्रों में विकास योजनाओं को मंजूरी मिलने या उनमें सुधार होने के कारण उनके अमल को वार्षिक दर तालिका में शामिल किया गया है।
- वास्तविक मूल्यांकन : मंजूर प्रादेशिक योजनाओं और विकास योजनाओं में हुए बदलावों को दर्ज करके मूल्यांकन विभागों और दरों में वास्तविकता लाई गई है।
- त्रुटि सुधार और समावेश : जिन संपत्तियों या गांवों की दरें पहले छूट गई थीं उन्हें अब शामिल किया गया है तथा गांवों के नामों में आवश्यक सुधार (दुरुस्ती) किए गए हैं।
- सूक्ष्म मूल्यांकन : मूल दरों को स्थिर रखते हुए नए उप-मूल्य विभाग और सूक्ष्म-मूल्य विभाग तैयार किए गए हैं।
- नंबरों का आधुनिकीकरण : सर्वे नंबर, गट नंबर और सीटीएस नंबरों में हुए बदलावों का भी रिकॉर्ड लिया गया है।
होंगे केवल आवश्यक अपडेट्स
सरकार के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, आवश्यक अपडेट्स करने के अलावा दरों में कोई अतिरिक्त वृद्धि नहीं की गई है, अतः संपूर्ण राज्य के सभी स्थानों के लिए वर्ष 2026-2027 की एएसआर दरें पूरी तरह से कायम और स्थिर रखी गई हैं।
रेडी रेकनर दरें नहीं बढ़ने से बिल्डर खुश
राज्य सरकार ने इस वर्ष भी प्रॉपर्टी मार्केट को राहत प्रदान की है। रेडी रेकनर दरों में वृद्धि नहीं होने से जिले के बिल्डर, डेवलपर्स खुश हैं। इनका कहना है कि संकट की घड़ी में मार्केट को संभालने का काम सरकार की ओर से किया गया है। आज जब युद्ध के कारण मार्केट में संकट के बादल मंडरा रहे हैं, दरें बढ़ जातीं तो और संकट पैदा हो सकता था।
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क्रेडाई, नरेडको, बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने राहत की सांस ली है और कहा कि निश्चित रूप से यह कदम सरकार ने जनता के हित में लिया है। क्रेडाई मेट्रो के पूर्व अध्यक्ष गौरव अग्रवाला कहते हैं कि नागपुर में जमीन की कीमतों में अनाप-शनाप वृद्धि पहले ही की जा चुकी है। कई स्थानों में जमीन की कीमतें काफी कम हैं लेकिन दरें कई गुना अधिक हैं। ऐेसे में ग्राहक जमीन लेने से कतराते थे। पिछले कुछ वर्षों में इसे तर्कसंगत करने का प्रयास किया गया है।
इस बार स्थिति ज्यादा खराब थी लेकिन सरकार ने लोगों की परेशानियों को समझा और उचित कदम उठाया है। बीएआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेंद्र आठवले ने कहा कि जब सारी चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं, ऐसे समय में रेडी रेकनर दरों को स्थिर रखना सही मायने में सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि आज बिल्डर दबाव में हैं। कई कच्चे माल की चीजें महंगी हो चुकी हैं।
