Shweta Nagrale Arrest: महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग की नींव हिला देने वाले ‘बोगस शालार्थ आईडी’ मामले में पुलिस और SIT का शिकंजा कसता जा रहा है। शुक्रवार को जांच टीम ने इस सिलसिले में एक महिला सहायक शिक्षिका श्वेता नरेश नगराले (40) को गिरफ्तार किया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में यह अब तक की 27वीं गिरफ्तारी है, जिसने विभाग के भीतर बैठे भ्रष्टाचार के बड़े सिंडिकेट की पोल खोल दी है।
शालार्थ आईडी घोटाले की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। श्वेता नगराले, जो चित्रलेखादेवी भोसले उच्च प्राथमिक शाला (कान्होलीबारा) में सहायक शिक्षिका के तौर पर कागजों में तैनात थीं, ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर अपना फर्जी शालार्थ आईडी बनवाया।
हैरानी की बात यह है कि श्वेता ने सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच सरकार से 5,55,932 रुपये का वेतन प्राप्त किया, जबकि वह एक भी दिन स्कूल नहीं गईं। स्कूल के अभिलेखों में उनकी नियुक्ति तो दिखाई गई, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी मौजूदगी शून्य थी।
यह सिर्फ एक शिक्षिका की धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि इसमें ऊपर से नीचे तक पूरा तंत्र शामिल रहा है। अब तक हुई 27 गिरफ्तारियों की सूची विभाग की साख पर बड़े सवाल खड़े करती है।
| पद | गिरफ्तारियों की संख्या |
| विभागीय शिक्षा उपसंचालक | 03 |
| शिक्षाधिकारी | 04 |
| वेतन अधीक्षक | 01 |
| लिपिक (Clerks) | 09 |
| स्कूल मुख्याध्यापक | 04 |
| शाला संचालक व अन्य | 06 |
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महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित SIT इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। जांच अधिकारियों के अनुसार, श्वेता ने मुख्याध्यापक, शिक्षाधिकारी और वेतन अधीक्षक के साथ सांठगांठ कर अवैध रूप से नियुक्ति हासिल की थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस फर्जी आईडी को बनाने के बदले में कितने रुपयों का लेन-देन हुआ और क्या इस तरह के और भी ‘भूतिया कर्मचारी’ सिस्टम में मौजूद हैं।