
कोराडी थर्मल प्लांट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Mahagenco fine: पर्यावरण संबंधी एक महत्वपूर्ण फैसले में पुणे स्थित राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की पश्चिमी क्षेत्र की पीठ ने कोराडी थर्मल पावर स्टेशन में नियमों के उल्लंघन के लिए महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) पर 5 करोड़ रुपये का दंड लगाया है।
न्यायाधिकरण ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) को लंबे समय तक नियमों का पालन न करने के लिए अतिरिक्त मुआवजे का आकलन और वसूली करने का भी निर्देश दिया है जो कई करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
यह जुर्माना 660 मेगावाट की 3 कोयला आधारित ताप विद्युत इकाइयों (इकाई 8, 9 और 10) से संबंधित है जिन्हें 2010 और 2017 के बीच चालू किया गया था। यद्यपि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जनवरी 2010 में पर्यावरण मंजूरी प्रदान कर दी थी लेकिन आरोप है कि महाजेनको कई महत्वपूर्ण शर्तों का पालन करने में विफल रही।
यह मामला शहर स्थित पर्यावरण संगठनों (कृषि विज्ञान आरोग्य संस्था, किसान मंच और प्रद्युम्न सहस्रभोजनी) द्वारा एनजीटी के समक्ष दायर आवेदन संख्या 62/2021 (डब्ल्यूजेड) के माध्यम से शुरू किया गया था। आवेदकों ने पर्यावरण मानदंडों के सख्त प्रवर्तन की मांग की जिनमें अनिवार्य हरित पट्टी का विकास, उपचारित सीवेज जल का उपयोग, फ्लाई ऐश का 100% उपयोग समेत अन्य शामिल है।
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निरीक्षण रिपोर्टों, हलफनामों और सभी हितधारकों द्वारा प्रस्तुत जानकारी की जांच करने के बाद, एनजीटी ने निष्कर्ष निकाला कि महाजेनको निर्धारित समय सीमा के भीतर 100% फ्लाई ऐश का उपयोग करने में विफल रहा और उसने राख भंडारण क्षेत्रों में अनिवार्य लाइनिंग के बिना अवैध रूप से फ्लाई ऐश को डंप किया।
इस संबंध में महाजेनको को पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में एमपीसीबी के पास 5 करोड़ रुपये का जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया गया। यह भी स्पष्ट किया गया कि वसूली गई राशि का उपयोग परियोजना स्थल और उसके आसपास के पर्यावरणीय सुधार और संवर्धन उपायों के लिए ही किया जाना चाहिए।






