
कामठी में बागी (AI Generated Photo)
Nagpur Suburban Politics: गुरुवार को कामठी में बागियों को मनाने में और तेजी आने के संकेत है। गोपनीय बैठकों के जरिए बागियों, निर्दलीय प्रत्याशियों को मनाने की कवायद शुरू हो गई है। नाम वापसी की तिथि तक मान मनौव्वल का दौर चलता रहेगा। अध्यक्ष पद के लिए कुल 18 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को वोटों के कटने का डर सता रहा है।
नप चुनाव में निजी संबंधों का हवाला देकर भी छोटे प्रत्याशी बड़ा नुकसान कर जाते हैं। इसी डर के कारण बुधवार से राजनीतिक दलों के प्रत्याशी बागियों, निर्दलीय प्रत्याशियों को अपने पक्ष में बिठाने की जुगत में लग गए है। बागी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी समीकरण बिगाड़ सकते है। 21 तारीख नाम वापसी का अंतिम दिन है। जहां अपील होगी वहां 25 तक अंतिम निर्णय होगा। 26 को चुनाव चिन्ह आवंटन एवं चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची सार्वजनिक की जाएगी।
नगर परिषद चुनाव के नामांकन भरने के बाद नामांकनों की जांच का कार्य भी पूर्ण होकर प्रत्याशियों की सूची चुनाव निर्णय अधिकारी द्वारा सार्वजनिक कर दी गई है। अध्यक्ष पद के लिए कुल 18 प्रत्याशी और 17 प्रभागों से 34 नगरसेवक पद हेतु कुल 206 प्रत्याशी चुनावी समर में उतरे हैं। नामांकन वापसी तक कितने प्रत्याशियों द्वारा नामांकन वापस लिए जाते है अब इस पर मतदाताओं की नजरें लगी हुई है।
कामठी नगर परिषद की स्थापना हुए करीब 100 वर्ष पूरे होने को आ गए। लेकिन बीते इस एक शतक में भी उपराजधानी नागपुर के उपनगर कहे जाने वाले कामठी शहर का जिस प्रकार से विकास होना चाहिए था वह नहीं हो पाया है। आज भी यहां के नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए जद्दोजहद करने को विवश है।
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जबकि यहां से चुनकर जाने वाले अनेक जनप्रतिनिधि सत्ता के उच्च पदों पर आरूढ़ हो चुके हैं किंतु कामठी की जनता आज भी सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। जिसका यहां के लोगों को बड़ा मलाल है। अब एक बार फिर आगामी दिनों में कामठी शहर के विकास की आस लोगों में जगी है।
ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कामठी में करोड़ों रुपये की शासकीय निधि से विविध विकास कार्य होने हैं। ऐसे में कामठी नगर परिषद का चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मतदाता भी मतदान को लेकर सोच विचार में मशगूल हो गए है। शहर की गली-गली में वर्तमान में केवल नप चुनाव की चर्चाएं उफान पर है।
ऐसे में सोच समझकर चुनाव में सही उम्मीदवार का चयन करना मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए प्रत्येक दल एड़ी चोटी का जोर लगाने को तैयार है। उनकी मंशा कामयाब होती है या नहीं यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इतना तय है कि चुनाव में इस बार मतदाता काफी गंभीर होकर ही अपना प्रतिनिधि चुनेंगे।






