पहले बनाई सीमेंट रोड, अब नाली के लिए तोड़ेंगे; कलमना मंडी में योजनाहीन विकास से सरकारी धन की बर्बादी!
Nagpur Kalamna APMC: राष्ट्रीय मार्केट का दर्जा मिलने के बावजूद नागपुर की कलमना एपीएमसी में किसान, व्यापारी व हमाल बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। व्यापारियों ने योजनाहीन विकास पर सवाल उठाए।
- Written By: अंकिता पटेल
कलमना एपीएमसी, कृषि मंडी,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Market Infrastructure: नागपुर एशिया की सबसे बड़ी कृषि मंडियों में शामिल कलमना कृषि उत्पन्न बाजार समिति (एपीएमसी) को राष्ट्रीय मार्केट का दर्जा दिया गया है। बावजूद इसके यहां पर जो स्थिति है वह किसी से छिपी नहीं है। न तो किसान के लिए और न ही कारोबारी और ग्राहकों के लिए मंडी में कोई सुविधाएं हैं।
सालाना हजारों करोड़ रुपये का कारोबार और बैंक में करीब 150 करोड़ रुपये की एफडी होने के बावजूद मंडी में बुनियादी सुविधाओं पर कभी ध्यान ही नहीं दिया गया। किसान, व्यापारी और हमाल आज भी गंदगी, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। व्यापारियों का आरोप है कि वर्चस्व की राजनीति और गुटबाजी ने मंडी के विकास पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है।
योजनाहीन विकास से धन की बर्बादी
हाल ही में मंडी में सीमेंट सड़कें बनाई गई लेकिन जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। चेंबर कचरे से भर चुके हैं और अब नालियां बनाने के लिए नई बनी सड़कों को फिर से तोड़ने की तैयारी है। व्यापारियों का कहना है कि यदि पहले योजना बनाकर काम किया जाता तो सरकारी धन की बर्बादी नहीं होती।
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योजनाहीन विकास से धन की बर्बादी
हाल ही में मंडी में सीमेंट सड़कें बनाई गई लेकिन जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। चेंबर कचरे से भर चुके हैं और अब नालियां बनाने के लिए नई बनी सड़कों को फिर से तोड़ने की तैयारी है। व्यापारियों का कहना है कि यदि पहले योजना बनाकर काम किया जाता तो सरकारी धन की बर्बादी नहीं होती।
जलभराव से बढ़ रही परेशानी
मंडी के कई हिस्सों में सड़क किनारे गट्ट नहीं लगाए गए हैं। इसके कारण बारिश का पानी और गंदगी सड़कों पर जमा रहती है। इससे वाहनों की आवाजाही और माल की ढुलाई प्रभावित होती है। समय पर छोटे-छोटे काम पूरे नहीं होने से हर बारिश में वही समस्याएं दोहराई जाती हैं।
रात में सुरक्षा भगवान भरोसे
कलमना मंडी में वास्तविक कारोबार रात 12 बजे से शुरू होता है। प्रति दिन 300 से 500 वाहन सब्जियां लेकर पहुंचते हैं और लाखों रुपये का नकद लेनदेन होता है। इसके बावजूद रात में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। व्यापारियों का आरोप है कि खुलेआम नशाखोरी होती है और चोरी व लूटपाट का डर हमेशा बना रहता है। महिला मजदूरों की बड़ी संख्या रात में काम करती है, फिर भी पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
सीसीटीवी और पुलिस चौकी की मांग व्यापारियों ने पूरे मंडी परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने, स्थायी पुलिस चौकी शुरू करने और रात में नियमित पुलिस गश्त की मांग की है। उनका कहना है कि सुरक्षा अधिकारी नियुक्त होने के बावजूद उनकी मौजूदगी शायद ही कभी
दिखाई देती है। यदि समय रहते सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो राष्ट्रीय मार्केट का दर्जा केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा, जबकि इसकी कीमत किसान, व्यापारी और हमाल रोजाना चुकाते रहेंगे।
गंदगी बनी सबसे बड़ी समस्या बारिश के मौसम में मंडी की बदहाली और बढ़ जाती है। जगह-जगह सब्जियों का सड़ता कचरा, जाम नालियां और दुर्गंध के बीच व्यापार करना मजबूरी बन गया है। सफाई कर्मचारी होने के बावजूद समय पर कचरा नहीं उठने से कचरे के ढेर लग जाते हैं। इससे न केवल व्यापार प्रभावित होता है बल्कि बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।
सवालों के घेरे में आया मंडी प्रशासन
कलमना मंडी में करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। प्रतिदिन सैकड़ों वाहन और हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। इसके बावजूद गंदगी, अधूरे विकास कार्य, कमजोर सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी का अभाव, पुलिस चौकी की कमी और व्यापारियों की लंबित मागे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
पहली बारिश ने साफ कर दिया है कि केवल सड़कें बनाने से मंडी आधुनिक नहीं बनती, जब तक सफाई, सुरक्षा, जल निकासी, निगरानी व्यवस्था और व्यापारियों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी का दावा केवल कागजों तक ही सीमित रहेगा।
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बारिश और गर्मी में लगातार खराब हो रही सब्जियां
जिन व्यापारियों को अब तक शेड उपलब्ध नहीं हुए हैं, उन्हें खुले में व्यापार करना पड़ रहा है। यदि शेष व्यापारियों के लिए शीघ्र शेड बना दिए जाएं तो बारिश और गर्मी में सब्जियां खराब नहीं होंगी।
– व्यापारी, सुनील निपाने
लाइसेंसधारी आढ़तियों को नहीं मिला स्थान
मंडी के कई लाइसेंसधारी आढ़तियों को अब तक दुकान नहीं मिली है। उनके लिए 2 नए शेड बनाए जाने थे। न्यायालय ने इस कार्य को पूरा करने के लिए 120 दिन का समय दिया था जिसमें से लगभग 80 दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ। मंडी सुधार कार्यों पर एपीएमसी सचिव को विशेष ध्यान देना चाहिए।
– युवा आढ़तिया सब्जी एसोसिएशन, अध्यक्ष, किशोर साहू
मुख्य मांगें
- गीले और सड़ी सब्जी के कचरे की तत्काल सफाई।
- मंडी परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाना।
- स्थायी पुलिस चौकी की स्थापना।
- रात में पुलिस पेट्रोलिंग और महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती।
- 2 नए शेड़ का शीघ्र निर्माण।
- सुरक्षा गाड़ों की संख्या बढ़ाना।
- सड़क किनारे गडू लगाने का कार्य पूर करना।
- महिला मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- मंडी में अधूरे विकास कार्यों को समय सीमा में पूरा करना।
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से अनुज साहू की रिपोर्ट
