वर्धा में आरक्षण उपवर्गीकरण के खिलाफ सड़कों पर उतरा अनुसूचित जाति समाज, विशाल मोर्चा निकाला
Wardha SC Community Protest: वर्धा में अनुसूचित जाति समाज के सैकड़ों लोगों ने आरक्षण उपवर्गीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा निकाला। आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
- Written By: केतकी मोडक
अनुसूचित जाति समाज मोर्चा निकालते हुए (सोर्स- फोटो नवभारत)
Wardha SC Community Protest Against Quota Split: अनुसूचित जाति के आरक्षण में उपवर्गीकरण के प्रस्ताव का विरोध करते हुए सोमवार, 29 जून को अनुसूचित जाति समाज के सैकड़ों लोगों ने वर्धा शहर में विशाल मोर्चा निकाला। मोर्चा स्थानीय बजाज चौक से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सिविल लाइन स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रतिमा परिसर पहुंचा, जहां एक सभा का आयोजन किया गया।
इसके बाद आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने जताई कड़ी आपत्ति
मोर्चा बजाज चौक से प्रारंभ होकर सुभाषचंद्र बोस प्रतिमा चौक, झांसी की रानी प्रतिमा चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रतिमा स्थल पहुंचा। यहां आयोजित सभा में वक्ताओं ने अनुसूचित जाति के आरक्षण में उपवर्गीकरण के निर्णय का कड़ा विरोध जताया।
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आंदोलनकारियों का कहना था कि अनुसूचित जाति की 59 जातियों को प्राप्त आरक्षण में उपवर्गीकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित बदर समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक किए बिना ही आपत्तियां और सुझाव मांगे जा रहे हैं। इससे राज्य की अनुसूचित जातियों के बीच विवाद और संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
उनका आरोप था कि वंचित वर्गों को न्याय दिलाने के नाम पर लिया गया यह निर्णय राजनीतिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास है, जिसका विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से आरक्षण उपवर्गीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त करने की मांग की।
सभा को संबोधित करते हुए आंदोलनकारियों ने कहा कि “यदि वास्तव में वंचित वर्गों को आरक्षण का सही लाभ पहुंचाना है, तो उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए बस्तियों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त बालवाड़ी एवं कॉन्वेंट स्कूल स्थापित किए जाएं, प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की जाए तथा पहली से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए आश्रमशालाएं खोली जाएं।”
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परिवारों को मानधन व रोजगार उपलब्ध कराएं
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय की तर्ज पर शैक्षणिक संस्थान स्थापित किए जाएं। उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण के लिए बार्टी (BARTI) की तर्ज पर अलग व्यवस्था की जाए। विद्यार्थियों की शिक्षा के दौरान उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी सरकार उठाए तथा उनके परिवारों को प्रति माह 5,000 रुपये का मानधन और रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
