करोड़ों की धोखाधड़ी, आयकर विभाग में नौकरी का झांसा, HC ने महिला आरोपी की जमानत याचिका की खारिज
High Court: आयकर विभाग में नौकरी दिलाने और निवेश योजनाओं में पैसा दोगुना करने के बहाने नकद और ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से कुल 3,17,00,000 रुपये की ठगी के मामले में पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज की गई।
- Written By: प्रिया जैस
हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका (फाइल फोटो)
Nagpur Crime: गणेशपेठ थाना अंतर्गत दर्ज एफआईआर में जमानत के लिए वैशाली शेट्टीगर की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। इस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने आरोपी महिला की जमानत याचिका खारिज कर दी। वैशाली पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406(आपराधिक विश्वासघात), 467(जालसाजी), और 120-बी (आपराधिक साजिश) सहित कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वैशाली और अन्य सह आरोपियों ने एक साजिश के तहत शिकायतकर्ता और उसके रिश्तेदारों को निशाना बनाया। आरोप है कि उन्होंने 2018 से 2023 के बीच शिकायतकर्ता से आयकर विभाग में नौकरी दिलाने और निवेश योजनाओं में पैसा दोगुना करने के बहाने नकद और ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से कुल 3,17,00,000 रुपये ठग लिए।
सह आरोपी को मिल चुकी है जमानत
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत में दलील दी कि आरोपी एक महिला है और उसके दो छोटे बच्चे हैं जिनकी उम्र क्रमशः 8 और 4 वर्ष है। उन्होंने याचिकाकर्ता की स्त्री रोग संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का भी हवाला दिया और कहा कि जेल में रहने के दौरान उसे गर्भाशय की सर्जरी की सलाह दी गई थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि वह लगभग एक साल से जेल में है और एक सह आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसलिए उसे भी समानता के आधार पर जमानत दी जानी चाहिए।
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सह आरोपी अब तक फरार
सरकारी वकील टी.एच. उदेशी ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि पूरा लेन-देन याचिकाकर्ता के बैंक खाते के माध्यम से हुआ था। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने यह राशि एक सह आरोपी मिस्टर रेड्डी को हस्तांतरित की जो अभी भी फरार है। पुलिस ने याचिकाकर्ता के पास से एचडीएफसी और बैंक ऑफ इंडिया की पासबुक, चेक बुक और मोबाइल फोन जैसे सबूत जब्त किए हैं जो अपराध में उसकी सक्रिय भूमिका को साबित करते हैं।
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अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने आयकर विभाग के भर्ती पत्रों जैसे सरकारी दस्तावेजों में जालसाजी की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि याचिकाकर्ता अपने महिला होने का फायदा नहीं उठा सकती। अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि उसने नौकरी के झूठे वादे करके पैसे एकत्र किए और सरकारी दस्तावेजों में जालसाजी की।
