HCBA Election: अभय सांबरे बने अध्यक्ष, नागपुर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के नतीजे घोषित, देखें लिस्ट
Bombay High Court Nagpur Bench: नागपुर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव संपन्न। अभय सांबरे अध्यक्ष चुने गए। उपाध्यक्ष, सचिव व कार्यकारिणी के नतीजे घोषित।
- Written By: प्रिया जैस
हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur High Court Bar Association: बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (एचसीबीए) की कार्यकारिणी के चुनाव शुक्रवार को संपन्न हुए। मतदान के बाद देर रात चुनाव आयोजन समिति ने अंतिम नतीजे घोषित किए। चुनाव में अभय सांबरे अध्यक्ष पद पर चुने गए।
उपाध्यक्ष पद की 2 सीटों के लिए मतदान हुआ। पुरुष वर्ग से गणेश खानजोडे उपाध्यक्ष बने, जबकि महिला वर्ग से स्मिता देशपांडे चुनी गईं।
नवनिर्वाचित पदाधिकारी
| पद | नाम |
|---|---|
| अध्यक्ष | अभय सांबरे |
| उपाध्यक्ष (पुरुष) | गणेश खानजोडे |
| उपाध्यक्ष (महिला) | स्मिता देशपांडे |
| सचिव | एस.आर. भोंगाडे |
| कोषाध्यक्ष | आर.आर. इनामदार तिवारी |
| सहसचिव | पी.के. मोहता |
| ग्रंथपाल प्रभारी | एस.के. फलटनकर |
कार्यकारी सदस्यों के चुनाव में 17 उम्मीदवार मैदान में थे जिनमें से 6 विजयी हुए। विजयी सदस्यों में एमएम जोशी, टीए मिर्ज़ा ताबिश, केएन जैन, आरके केवले, एचवी ढगे और एड. वीपी इंगले, आईडी ठाकरे, एसडी गुप्ता और बीएस नेहा अग्रवाल विजयी हुईं।
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चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने में प्रकाश मेघे, भानुदास कुलकर्णी, अरुण पाटिल, देऊल पाठक, संग्राम शिरपूरकर, निखिल पाध्ये, वैशाली खेडकर और मुग्धा चांदुरकर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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यंत्रणा से किसानों के अधिकारों का होगा शोषण
नागपुर में किसान अपनी उपज का माल डेमोक्रेटिक तरीके से बेचने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कृषि उत्पन्न बाजार समिति (एपीएमसी) एक्ट लागू किया है परंतु युति सरकार ने ‘राष्ट्रीय नामांकित बाजार’ समिति एक्ट विधानसभा में मंजूर किया है।
इससे जो एपीएमसी अच्छी तरह से डेवलप हो चुकी हैं, उसे पणन मंत्री और सरकार द्वारा नियुक्त किए गए 6 प्रतिनिधि मैनेज करेंगे। यह किसानों के लिए ठीक नहीं है। मुंबई एपीएमसी के उपसभापति हुकुमचंद आमधरे के अनुसार यह एक ऐसी यंत्रणा है जो डेमोक्रेसी और किसानों के अधिकारों का फायदा उठाने के लिए बनाई जा रही है।
इसे मुंबई व नागपुर हाई कोर्ट ने स्टे दिया है। अभी न्याय बाकी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी महाराष्ट्र सरकार की अपील खारिज की है। बावजूद इसके महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऐसा बिल पास करना कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट होगा। सरकार को ऐसा करते हुए गलत फैसले नहीं लेना चाहिए।
