कृषि उत्पन्न बाजार समिति में किसानों का गुस्सा फूटा, कम भाव और CCI की कठोर शर्तों पर मचा हंगामा!

Farmers Protest in Hinganghat: हिंगनघाट कृषि बाजार समिति में कपास किसानों का आक्रोश, CCI की कठोर शर्तों और कम भावों को लेकर हंगामा। खरीदी प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की मांग।
कृषि उत्पन्न बाजार समिति में किसानों का गुस्सा फूटा
कृषि उत्पन्न बाजार समिति में किसानों का गुस्सा फूटा
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विदर्भ की प्रसिद्ध हिंगनघाट कृषि उत्पन्न बाजार समिति में आज किसानों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया। खुले बाजार में कपास के दाम हमी भाव से कम मिलने और भारतीय कपास निगम (CCI) की जटिल खरीदी प्रक्रिया के कारण किसानों में नाराज़गी फैल गई। लगातार हुई बारिश के चलते कपास की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे उसमें 20 से 22 प्रतिशत तक नमी पाई जा रही है। वहीं, CCI ने खरीदी के लिए नमी की सीमा केवल 8 से 12 प्रतिशत तय की है। इस वजह से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है और उनकी नाराज़गी खुलकर सामने आई है।

इस वर्ष पहली बार CCI ने ‘कपास किसान ऐप’ के माध्यम से पंजीकरण की सुविधा शुरू की है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल साबित हो रही है। तकनीकी अड़चनों और नेटवर्क की समस्याओं के कारण किसानों को खरीदी पंजीकरण में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

CCI की कठोर और अव्यवहारिक शर्तों को तुरंत रद्द किया जाए

आज बाजार समिति में लगभग 500 गाड़ियां कपास की पहुंचीं, लेकिन CCI ने केवल एक ही गाड़ी की खरीदी की। इससे किसानों में भारी असंतोष फैल गया। नाराज़ किसानों ने बाजार परिसर में सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की और खरीदी प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की मांग की। किसानों का कहना है कि CCI की कठोर और अव्यवहारिक शर्तों को तुरंत रद्द किया जाए। पिछली बार की तरह केवल आवश्यक दस्तावेज़ों की जांच कर खरीदी शुरू की जानी चाहिए।

किसानों की यह आवाज अब बुलंद

इसके साथ ही, इस वर्ष बारिश से बढ़ी नमी को देखते हुए 15 प्रतिशत तक नमी की छूट दी जानी चाहिए। किसानों का यह भी कहना है कि यदि नमी के अनुपात में दर घटा भी दी जाए तो वे तैयार हैं, लेकिन खरीदी शुरू होना आवश्यक है। किसानों की यह आवाज अब बुलंद होती जा रही है और उम्मीद की जा रही है कि सरकार शीघ्र ही किसानों के हित में सकारात्मक निर्णय लेगी।

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