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घोडाझरी अभयारण्य के पास माइनिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी, वन्यजीव कॉरिडोर पर खतरा

Ghodazari Wildlife Sanctuary: चंद्रपुर के घोडाझरी वन्यजीव अभयारण्य के पास खनन परियोजना को मिली मंजूरी से बाघ कॉरिडोर पर खतरा बढ़ गया है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका गहरा गई है।

  • By आंचल लोखंडे
Updated On: Jan 07, 2026 | 09:17 PM

Ghodazari Wildlife Sanctuary:चंद्रपुर के घोडाझरी वन्यजीव अभयारण्य (सोर्सः सोशल मीडिया)

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Nagpur News: महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव मंडल की 25वीं बैठक में एक विवादित निर्णय लेते हुए चंद्रपुर जिले के घोडाझरी वन्यजीव अभयारण्य के समीप ‘लोहारडोंगरी’ क्षेत्र में खनन परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह इलाका बाघों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कॉरिडोर है और यहां खनन शुरू होने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ सकती हैं।

बैठक की मुख्य बातें

मुंबई में मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास ‘वर्षा’ बंगले पर आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और वन मंत्री गणेश नाईक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

बढ़ सकता है मानव-बाघ संघर्ष

बैठक में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) सहित अन्य विकास परियोजनाओं पर चर्चा की गई। इसी दौरान लोहारडोंगरी क्षेत्र और ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के समीप स्थित मार्की-मांगली इलाके में खनन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

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परियोजना पर उठ रहे सवाल

वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की है।

सीमित रोजगार: रिपोर्ट के अनुसार, इस खदान से केवल 120 नौकरियां सृजित होंगी, जिनमें से मात्र 32 नौकरियां स्थायी होंगी।

कम उत्पादन: खदान की वार्षिक उत्पादन क्षमता भी बेहद कम है। लगभग 1.1 मिलियन टन। आलोचकों का कहना है कि इतने सीमित उत्पादन के लिए बड़े वन क्षेत्र की बलि देना तर्कसंगत नहीं है।

अध्ययन का अभाव: आरोप है कि इस परियोजना के जंगल और वन्यजीवों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर कोई विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया गया है।

बाघों का गलियारा: लोहारडोंगरी क्षेत्र बाघों के आवागमन का प्रमुख मार्ग है। यहां मानवीय गतिविधियां बढ़ने से बाघ रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे संघर्ष की आशंका बढ़ेगी।

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विदर्भ के पर्यावरण पर संकट

आलोचकों का कहना है कि विदर्भ क्षेत्र, जिसने सरकार को बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि दिए हैं, आज कोयला वॉशरी, खदानों और बढ़ती जंगल कटाई के कारण विनाश की कगार पर पहुंच चुका है। एक ओर सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर बाघ संरक्षण क्षेत्रों के आसपास खनन परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Ghodazari wildlife sanctuary mining project approval

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Published On: Jan 07, 2026 | 09:17 PM

Topics:  

  • Maharashtra
  • Nagpur News
  • Wildlife Sanctuary

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