चुनाव नतीजे टलने पर राजनीतिक घमासान, बावनकुले बोले- इलेक्शन कमिशन की गलत व्याख्या की वजह से...

Maharashtra Elections: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना 21 दिसंबर तक स्थगित करने का आदेश दिया है। जिसके बाद राज्य चुनाव आयोग पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
Chandrashekhar Bawankule
चंद्रशेखर बावनकुले (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chandrashekhar Bawankule Statement: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना अब 21 दिसंबर को होगी। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) द्वारा कथित तौर पर 'कानूनों की गलत व्याख्या' करने के कारण यह फैसला सुनाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले दोनों ने एसईसी की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है।

मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने राज्य में सभी नगर निकाय चुनावों की मतगणना 21 दिसंबर को कराने का निर्देश दिया है। न्यायालय का यह आदेश उस दिन आया जब महाराष्ट्र में 264 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए मतदान प्रक्रिया जारी थी।

पहले राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने मंगलवार को हो रहे चुनावों की मतगणना के लिए 3 दिसंबर की तारीख निर्धारित की थी। अब उच्च न्यायालय ने कहा है कि सभी 288 स्थानीय निकायों की मतगणना 21 दिसंबर को होगी।

एसईसी पर 'कानूनों की गलत व्याख्या' का आरोप

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) द्वारा 'कानूनों की गलत व्याख्या' किए जाने के कारण उच्च न्यायालय ने मतगणना 21 दिसंबर तक स्थगित कर दी है। मंत्री ने यह दावा किया कि यह निर्णय एसईसी की कार्रवाई के कारण ही लिया गया है। बावनकुले ने यह भी बताया कि वह लगातार कहते रहे हैं कि एसईसी कानूनों की गलत व्याख्या कर रहा है और बिना किसी आधार के चुनाव स्थगित कर रहा है। उन्होंने यह जानकारी भी दी कि राज्य के किसी भी हिस्से से चुनाव स्थगित करने की कोई मांग नहीं की गई थी, फिर भी आयोग ने देरी की, जिसके परिणामस्वरूप उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने जताई नाराजगी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस मामले को लेकर एसईसी के खिलाफ नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आयोग ने कानून की गलत व्याख्या की है। फडणवीस ने इस बात को उचित नहीं माना कि 264 नगरपालिका परिषदों और नगर पंचायतों में मतगणना को सिर्फ इसलिए स्थगित कर दिया जाए, क्योंकि 24 अन्य स्थानीय निकायों में चुनाव 20 दिसंबर तक स्थगित कर दिए गए हैं।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एसईसी और अदालतें दोनों स्वतंत्र संस्थाएं हैं और उनके आदेशों का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि मुझे नहीं पता कि निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता कौन हैं, लेकिन जो कुछ भी हुआ है वह बिल्कुल सही नहीं है।

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