हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Nagpur News: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सरफेसी अधिनियम, 2002 (SARFAESI Act) के तहत शुरू की गई वसूली की कार्रवाई को चुनौती देते हुए पंजू दासवानी और रोशनी दासवानी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने खरीदारों द्वारा कर्ज चुकाए जाने के बाद कार्रवाई को रद्द कर दिया। साथ ही गिरवी रखी सम्पत्ति के दस्तावेज भी लौटाने का निर्देश बैंक को दिया।
याचिकाकर्ताओं ने संबंधित कर्ज की पूरी बकाया राशि 74,10,000 रुपए का भुगतान कर दिया था। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने जरीपटका स्थित 2,400 वर्गफुट जमीन को खरीदने के लिए मूल कर्जदारों, विमल जोगे और आशिओश जोगे के साथ 21 अक्टूबर 2024 को एग्रीमेंट किया था।
विशेषत: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने प्रतिवादियों को कर्ज सुविधा प्रदान की थी। उनके द्वारा कर्ज चुकाने में चूक किए जाने के कारण बैंक ने संपत्ति के खिलाफ सरफेसी अधिनियम के प्रावधानों को लागू करते हुए 10 फरवरी 2025 को कब्ज़े का नोटिस जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने अपने हितों की रक्षा के लिए इस विवाद में हस्तक्षेप किया।
उन्होंने पहले कर्ज वसूली न्यायाधिकरण (DRT) के समक्ष कार्यवाही दायर की और बैंक को संपत्ति का भौतिक कब्ज़ा लेने से रोकने के लिए अंतरिम राहत की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि 25 अप्रैल 2025 को इस न्यायालय के एक आदेश के अनुपालन में संपूर्ण बकाया राशि 74,10,000 रुपए का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से किया जा चुका है और यह राशि बैंक द्वारा विधिवत भुनाई भी जा चुकी है।
कोर्ट ने कहा कि चूंकि राशि की वसूली हो चुकी है और इस तथ्य पर उत्तरदाता बैंक ने भी विवाद नहीं किया है, इसलिए इस कर्ज से संबंधित शुरू की गई कार्यवाही को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने कहा कि 29 अप्रैल 2025 को दिए गए अंतरिम आदेश के तहत संपत्ति की प्रस्तावित नीलामी को पहले ही रोक दिया गया था।
यह भी पढ़ें – शाहू हत्याकांड: घंटों तक रास्ता रोको आंदोलन, BJP कार्यकर्ता की हत्या से तनाव, कैसे शुरू हुआ विवाद?
कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सरफेसी अधिनियम के तहत शुरू की गई समस्त कार्रवाई को रद्द किया जाता है। बैंक को यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है तो वह गिरवी रखी गई संपत्ति के स्वामित्व के दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को लौटा दे।