आदित्य ठाकरे व पंकजा मुंडे की मुलाकात, सियासी खिचड़ी या सिर्फ शिष्टाचार? महाराष्ट्र की राजनीति फिर आएगा भूचाल
MVA rift MLC election: पंकजा मुंडे से मिले आदित्य ठाकरे। नदी प्रदूषण के बहाने क्या फिर साथ आएंगे उद्धव और भाजपा? जानें MLC उम्मीदवार चयन को लेकर MVA में मचे घमासान और बैठकों का पूरा सच।
- Written By: गोरक्ष पोफली
पंकजा मुंडे के रामटेक स्थित आवास पर आदित्य ठाकरे और वंदना चव्हाण (सोर्स: सोशल मीडिया)
Aditya Thackeray meets Pankaja Munde: महाराष्ट्र की राजनीति में दांव-पेंच का खेल इस कदर उलझ गया है कि अब यह समझ पाना मुश्किल है कि कौन किसका दोस्त है और कौन दुश्मन। कल जब शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भाजपा नेता मुरलीधर मोहोल से मुलाकात की, तो कयासों का बाजार गर्म था। लेकिन अब आदित्य ठाकरे और पंकजा मुंडे की मुलाकात ने इन कयासों को एक नई ऊंचाई दे दी है।
नदी प्रदूषण का बहाना या गठबंधन का नया ठिकाना?
भाजपा नेता पंकजा मुंडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुलाकात की जानकारी देते हुए बताया कि विधायक आदित्य ठाकरे और वंदना चव्हाण उनके रामटेक स्थित आवास पर आए थे। पंकजा मुंडे के मुताबिक, चर्चा का मुख्य विषय नदी प्रदूषण था और इस मुद्दे पर विस्तार से सकारात्मक बातचीत हुई। हालांकि, राजनीति के जानकार इसे सिर्फ नदी प्रदूषण तक सीमित नहीं देख रहे हैं। पंकजा मुंडे और ठाकरे परिवार के पुराने मधुर संबंध जगजाहिर हैं। ऐसे समय में जब शिवसेना (UBT) अपने ही गठबंधन के साथियों (कांग्रेस और NCP-SP) से नाराज चल रही है, भाजपा नेताओं के साथ इन बैक-टू-बैक बैठकों ने घर वापसी की चर्चाओं को हवा दे दी है।
नदी प्रदूषणाच्या संदर्भात काही महत्वाच्या विषयांवर चर्चा करण्यासाठी आमदार श्री आदित्य ठाकरे, श्रीमती वंदना चव्हाण हे आज माझ्या रामटेक या निवासस्थानी आले होते, यावेळी प्रदूषणाच्या मुद्द्यावर विस्तृत आणि सकारात्मक चर्चा झाली.@AUThackeray @MPVandanaChavan pic.twitter.com/OPVN6xqXqI — Pankaja Gopinath Munde (@Pankajamunde) April 29, 2026
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MLC उम्मीदवारी और MVA में बढ़ती दरार
महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर इस समय सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। शिवसेना (UBT) द्वारा अंबादास दानवे को विधान परिषद (MLC) का उम्मीदवार घोषित करने के एकतरफा फैसले ने गठबंधन में आग लगा दी है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा है कि इस फैसले से पहले कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया। वडेट्टीवार का मानना है कि इस सीट पर उद्धव ठाकरे को खुद खड़ा होना चाहिए था, न कि दानवे को।
रोहित पवार (NCP-SP) के बयानों में भी इस फैसले को लेकर हिचकिचाहट साफ नजर आ रही है। गठबंधन में बढ़ती इस अस्थिरता और भाजपा नेताओं के साथ बढ़ती नजदीकी ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शिवसेना (UBT) फिर से मायके यानी भाजपा के साथ जाने का मन बना रही है?
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क्या शिवसेना (UBT) का पैर फिर फिसलेगा?
संजय राउत का मुरलीधर मोहोल से मिलना और फिर आदित्य ठाकरे का पंकजा मुंडे से मिलना, महज इत्तेफाक नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान ने भी आग में घी डालने का काम किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि हमें छिपकर मिलने की जरूरत नहीं है। क्या कांग्रेस और शरद पवार के साथ बढ़ते मतभेदों के कारण उद्धव सेना फिर से भाजपा के साथ भरत-मिलाप की तैयारी में है? क्या MLC चुनाव के बहाने गठबंधन टूटने की कगार पर है? ये वो सवाल हैं जिनके जवाब आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएंगे।
