

Ambadas Danve MLC candidate: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक ही सवाल गूंज रहा है क्या महाविकास अघाड़ी (MVA) का फेविकोल कमजोर पड़ गया है? अप्रैल 2026 की तपती गर्मी में विधान परिषद (MLC) चुनाव की घोषणा होते ही गठबंधन के भीतर दरारें अब गहरी खाई में बदलती दिख रही हैं। शिवसेना (UBT) द्वारा अंबादास दानवे को उम्मीदवार बनाने के एकतरफा फैसले ने कांग्रेस के खेमे में आग लगा दी है।
कांग्रेस के कद्दावर नेता विजय वडेट्टीवार ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। वडेट्टीवार का कहना है कि गठबंधन में यह चर्चा हुई थी कि अगर उद्धव ठाकरे खुद उम्मीदवार बनते हैं, तो पूरा विपक्ष एकजुट होकर उन्हें समर्थन देगा। लेकिन अचानक अंबादास दानवे के नाम की घोषणा ने कांग्रेस को हतप्रभ कर दिया है। यह विवाद इसलिए भी गंभीर है क्योंकि वडेट्टीवार और दानवे के बीच का 36 का आंकड़ा पुराना है। सितंबर 2023 में वडेट्टीवार ने आरोप लगाया था कि दानवे ने फर्जी ओबीसी (OBC) प्रमाण पत्र बनवाया है, जबकि वे मराठा समाज से आते हैं। उस समय मची रार अब 2026 के चुनाव में फिर से उभर आई है। वडेट्टीवार का कहना है कि बिना सलाह-मशविरे के दानवे को थोपना गठबंधन के धर्म के खिलाफ है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने संकेत दिए हैं कि अगर शिवसेना (UBT) ने अपना अड़ियल रवैया नहीं छोड़ा, तो कांग्रेस अपना अलग उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है। सपकाल फिलहाल दिल्ली में आलाकमान के साथ बैठक कर रहे हैं। चर्चा है कि कांग्रेस अब एकला चलो की नीति पर विचार कर रही है, जिससे 12 मई को होने वाले चुनाव में विपक्ष की एकता तार-तार हो सकती है।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चटखारे लेकर जो चर्चा सुनी जा रही है, वह है उद्धव सेना की घर वापसी! हाल ही में संजय राउत की मुरलीधर मोहोल से मुलाकात और उद्धव ठाकरे की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कथित भेंट ने नई अटकलों को जन्म दे दिया है। जब फडणवीस से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में कहा, हमें छिपकर मिलने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस एक बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूकंप ला दिया है। क्या यह महज इत्तेफाक है या किसी बड़े भरत-मिलाप की पटकथा? क्या उद्धव ठाकरे कांग्रेस का साथ छोड़कर फिर से अपनी पुरानी सहयोगी भाजपा के पास (अपने राजनैतिक मायके) लौटने की तैयारी कर रहे हैं?
महाविकास अघाड़ी गठबंधन की नाव में छेद बड़ा हो चुका है। एक तरफ अंबादास दानवे खुद को साझा उम्मीदवार बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे अपमान बता रही है। अगर उद्धव और फडणवीस की नजदीकी बढ़ती है, तो 2026 का यह विधान परिषद चुनाव महाराष्ट्र के राजनैतिक मानचित्र को हमेशा के लिए बदल सकता है।