

MVA Internal Conflict: महाराष्ट्र की राजनीति में ऑल इज वेल का दावा करने वाली महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं लग रहा है। शिवसेना (UBT) द्वारा अंबादास दानवे को विधान परिषद (MLC) का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब गठबंधन के बाकी साथियों के चेहरों पर शिकन साफ देखी जा सकती है। राकांपा (शरद चंद्र पवार) के युवा नेता रोहित पवार के हालिया बयान ने इस शक को और पुख्ता कर दिया है कि दानवे के नाम पर गठबंधन में एकमत की भारी कमी है।
जब रोहित पवार से अंबादास दानवे की उम्मीदवारी पर सवाल किया गया, तो उनके जवाबों में आत्मविश्वास की कमी साफ झलक रही थी। हालांकि उन्होंने ऊपरी तौर पर यह कहा कि दानवे ने विपक्ष के नेता के रूप में अच्छा काम किया है, लेकिन उनके बयान का दूसरा हिस्सा गठबंधन की कलह को उजागर कर गया। रोहित पवार ने कहा, हमें उम्मीद थी कि सबसे वरिष्ठ नेता उद्धव ठाकरे खुद इस सीट से चुनाव लड़ेंगे। लेकिन उन्होंने शिवसैनिक दानवे को आगे करने का फैसला किया। जानकार मानते हैं कि शरद पवार गुट चाहता था कि उद्धव खुद मैदान में उतरें ताकि गठबंधन को एक बड़ा चेहरा मिले, लेकिन दानवे के नाम ने राकांपा (SP) को असमंजस में डाल दिया है।
रोहित पवार के पास दानवे की उम्मीदवारी को लेकर कोई ठोस जवाब नहीं था। उन्होंने गेंद को सीनियर लीडरशिप के पाले में डालते हुए कहा कि शरद पवार, सुप्रिया सुले और शशिकांत शिंदे जैसे नेताओं की कोर टीम इस पर अंतिम चर्चा करेगी। रोहित का यह कहना कि हमारे नेता अपनी भूमिका तय करेंगे, इस बात का संकेत है कि अभी तक शरद पवार गुट ने आधिकारिक तौर पर दानवे के नाम पर अपनी मुहर नहीं लगाई है।
गठबंधन में तालमेल की कमी तब और स्पष्ट हो गई जब रोहित ने कांग्रेस के रुख पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज शाम 7 बजे तक या कल तक अपनी स्थिति स्पष्ट कर देगी। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस इस एकतरफा फैसले से बेहद नाराज है। अगर कांग्रेस अपना अलग उम्मीदवार उतारती है, तो रोहित पवार और उनकी पार्टी के लिए धर्मसंकट खड़ा हो जाएगा कि वे 'मातोश्री' का साथ दें या कांग्रेस का।
रोहित पवार का रक्षात्मक रवैया और कांग्रेस का मौन यह बताने के लिए काफी है कि एमवीए की नाव इस समय हिचकोले खा रही है। क्या आज शाम 7 बजे कांग्रेस कोई बड़ा धमाका करेगी? या फिर शरद पवार के हस्तक्षेप के बाद रोहित पवार और कांग्रेस बेमन से दानवे का समर्थन करेंगे? फिलहाल, महाराष्ट्र की सियासत में 'वेट एंड वॉच' की स्थिति बनी हुई है।