
गिरीश पांडव, प्रफुल्ल गुडधे और यशोमति ठाकुर (सोर्स: सोशल मीडिया)
नागपुर: विधानसभा चुनाव में पराजित हुए कांग्रेस के प्रत्याशी अभी भी उबर नहीं पाये हैं। कई लोगों को संदेह है कि चुनाव में धांधली हुई है। कांग्रेस को पहले से ही ईवीएम पर संदेह है। इस चुनाव में मुख्यमंत्री कार्यालय पर हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए विदर्भ के 8 विधानसभा क्षेत्रों के कांग्रेस उम्मीदवारों ने मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में याचिका दायर की है। याचिका में चुनाव रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग की गई है। साथ ही मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस के निर्वाचन को भी चुनौती दी गई है।
दक्षिण पश्चिम नागपुर विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस के उम्मीदवार प्रफुल्ल गुडधे, दक्षिण नागपुर के उम्मीदवार गिरीश पांडव, अमरावती जिले के तिवसा निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार और पूर्व मंत्री यशोमति ठाकुर, पूर्व मंत्री राजेंद्र शिंगणे, सुभाष धोटे, शेखर शेंडे, संतोष सिंह रावत, सतीश वारजुरकर ने यह याचिका दायर की है।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस महाविकास अघाड़ी को बड़ी जीत हासिल हुई है। इसलिए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को काफी उम्मीदें थीं। कांग्रेस नेता भी दावे कर रहे थे कि राज्य में महाविकास अघाड़ी फिर से सत्ता में आएगी। लेकिन चुनाव नतीजों ने महाविकास अघाड़ी को बड़ा झटका दिया। कांग्रेस के केवल 16 विधायक चुने गये।
इस चुनाव में कई बड़े नेता हार गये। इनमें बालासाहेब थोरात, यशोमति ठाकुर शामिल हैं, जो पहले चुनाव के बाद से कभी नहीं हारे हैं। इसलिए कई लोगों को चुनाव के नतीजों पर संदेह है। कानूनी प्रक्रिया तो करनी ही होगी। हालांकि, चुनाव आयोग ने ईवीएम से चुनाव कराने से पहले इस कानूनी प्रक्रिया को पूरा नहीं किया। यदि ईवीएम से चुनाव कराया जाए तो कुछ मानदंड दिए गए थे। इसके कारण भी बताने होंगे। वो भी नहीं किया।
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इतना ही नहीं याचिकाकर्ता प्रफुल गुड़धे ने कहा कि चुनाव आयोग ने ईवीएम से चुनाव कराने की अधिसूचना जारी नहीं की है। चुनाव परिणाम मांगने के बाद भी हारे हुए प्रत्याशियों को सीसीटीवी फुटेज, फॉर्म नंबर 17 उपलब्ध नहीं कराया जाता है। पांच वीवीपैट के पुनर्मूल्यांकन को मंजूरी दी गई है। कई लोगों ने इसके लिए भुगतान किया है।
हालांकि, वीवीपेट की भी गिनती नहीं की जाती है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत यह जानकारी देना अनिवार्य है। गुड़धे ने कहा कि इसके बावजूद हमारे अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। इन सभी मुद्दों को याचिका में शामिल किया गया है।






