जल रहा खैबर पख्तूनख्वा! 2025 में 550 से ज्यादा हिंसक घटनाएं, HRCP की रिपोर्ट से मचा हड़कंप

HRCP Report 2025: पाकिस्तान के HRCP की नई रिपोर्ट ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की भयावह सुरक्षा स्थिति को सामने रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में आतंकी हमलों, हिंसक घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
Khyber Pakhtunkhwa is burning! More than 550 violent incidents in 2025, HRCP report sparks alarm.
विस्फोट की एक तस्वीर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Khyber Pakhtunkhwa Terror Attacks: पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने वर्ष 2025 के दौरान खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में लगातार बिगड़ती सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार यह इलाका पूरे साल अस्थिर बना रहा और आतंकी हिंसा ने आम लोगों के साथ-साथ सुरक्षा बलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया।

HRCP ने इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि केवल जुलाई 2025 में ही पूरे देश में कम से कम 82 आतंकी हमले हुए। इनमें से करीब दो-तिहाई घटनाएं खैबर पख्तूनख्वा और उसके पूर्ववर्ती कबायली जिलों में दर्ज की गईं जिससे यह साफ होता है कि यह क्षेत्र आतंकियों का प्रमुख निशाना बना हुआ है।

हालात में कोई खास सुधार नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2025 में भी हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ। इस महीने प्रांत में 45 आतंकी हमले दर्ज किए गए, जिनमें 54 लोगों की मौत हुई और 49 अन्य घायल हो गए। इन घटनाओं में से 20 हमले खैबर पख्तूनख्वा के विलय किए गए जिलों में हुए, जहां 21 लोगों की जान चली गई। मृतकों में छह पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी, तीन आतंकी और 12 आम नागरिक शामिल थे।

आतंकी संगठन को लेकर भी चिंता

एचआरसीपी के अनुसार, अवामी नेशनल पार्टी (ANP) के खैबर पख्तूनख्वा प्रदेश अध्यक्ष मियां इफ्तिखार हुसैन ने इन हालात को आम धारणा से कहीं ज्यादा गंभीर बताया है। उनका कहना है कि केवल विलय किए गए कबायली इलाकों में ही नहीं बल्कि प्रांत के बसे हुए क्षेत्रों में भी कई उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं। उन्होंने आतंकी संगठन दाएश (ISIS/ISKP) की मौजूदगी को लेकर भी चिंता जताई है। इसी तरह, क़ौमी वतन पार्टी (QWP) के प्रांतीय अध्यक्ष सिकंदर शेरपाओ के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी 2025 से अब तक लगभग 550 हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें से अधिकांश घटनाएं विलय किए गए जिलों में सामने आई हैं। शेरपाओ के अनुसार, क्षेत्र में न सिर्फ वास्तविक आतंकी तत्व बल्कि नकलची गिरोह और संगठित आपराधिक नेटवर्क भी सक्रिय हो गए हैं जिससे हालात और जटिल हो गए हैं।

लोकतंत्र के लिए खतरनाक

वज़ीरिस्तान और बाजौर को लेकर स्थिति और भी चिंताजनक बताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दाएश या इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि कई इलाकों में सिविल सेवकों और पुलिसकर्मियों को दोपहर बाद छिपने पर मजबूर होना पड़ता है।

HRCP ने जबरन गायब किए जाने की लगातार जारी प्रथा पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। आयोग का कहना है कि राज्य विरोधी गतिविधियों के आरोप में पकड़े गए लोगों को अक्सर संवैधानिक प्रावधानों के तहत अदालत में पेश नहीं किया जाता। इसके अलावा, पीटीएम जैसे अधिकार-आधारित आंदोलनों और ANP जैसी प्रगतिशील पार्टियों के खिलाफ कथित राजनीतिक उत्पीड़न को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया गया है।

रिपोर्ट में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। खासकर उन पत्रकारों को धमकियों, सेंसरशिप और लक्षित हमलों का सामना करना पड़ रहा है जो जबरन गुमशुदगी और आतंकी हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

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