Western Railway Pre-Monsoon Work (फोटो क्रेडिट-X)
Mumbai Local Train Monsoon Update: मुंबई की जीवनरेखा मानी जाने वाली लोकल ट्रेनों की रफ्तार मानसून के दौरान न थमे, इसके लिए पश्चिम रेलवे (WR) ने अभी से कमर कस ली है। चर्चगेट से विरार तक के उपनगरीय रेल नेटवर्क को मूसलाधार बारिश के लिए तैयार करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। रेलवे अधिकारियों का लक्ष्य है कि जून के पहले सप्ताह में मानसून के आगमन से पहले, यानी 25 मई तक सभी प्री-मानसून तैयारियां मुकम्मल कर ली जाएं। पिछले साल के अनुभवों से सबक लेते हुए, इस बार तैयारियों को लगभग तीन सप्ताह पहले ही तेज कर दिया गया है ताकि यात्रियों को जलजमाव जैसी समस्याओं से निजात मिल सके।
पश्चिम रेलवे ने इस वर्ष तकनीक और बुनियादी ढांचे के सुधार पर विशेष ध्यान दिया है। पटरियों पर पानी भरने की समस्या को हल करने के लिए ड्रेनेज सिस्टम को अपग्रेड किया गया है और संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां विशेष सुरक्षा उपाय किए गए हैं। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनोद अभिषेक के अनुसार, यात्रियों की आवाजाही सुचारु रहे, इसके लिए सभी विभाग तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। तैयारियों की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम भी गठित की गई है जो साप्ताहिक स्तर पर कार्यों की प्रगति की निगरानी करेगी।
रेल पटरियों को बाढ़ मुक्त रखने के लिए पश्चिम रेलवे इस वर्ष पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक पंपों का इस्तेमाल करेगा। कुल 126 शक्तिशाली जल निकासी पंप विभिन्न जलजमाव वाले हॉटस्पॉट पर लगाए जा रहे हैं। इन पंपों की खासियत यह है कि इन्हें मानसून शुरू होने से 30 दिन पहले ही प्रतिदिन चालू करके टेस्ट किया जाएगा। इसके अलावा, पटरियों और नालों से कचरा व गाद निकालने के लिए लगभग 600 ‘मक स्पेशल’ ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया गया है, ताकि पानी का बहाव बिना किसी रुकावट के नालों तक पहुँच सके।
ये भी पढ़ें- गैस चैंबर बन रही मुंबई! चिंताजनक स्तर पर पहुंचा कई इलाकों का AQI, स्मॉग के कारण कम हुई विजिबिलिटी
मानसून के दौरान दादर, माहिम और वसई जैसे निचले इलाकों में अक्सर लोकल ट्रेन सेवाएं बाधित हो जाती हैं। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए पश्चिम रेलवे ने दादर और माहिम के बीच पटरियों की ऊंचाई बढ़ाने का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। साथ ही, गोरेगांव-मलाड, प्रभादेवी-माटुंगा और बोरीवली-विरार सेक्शन में अतिरिक्त जल निकासी मार्ग बनाए गए हैं। इन बुनियादी ढांचागत सुधारों से यह सुनिश्चित होगा कि भारी बारिश के दौरान भी पटरियों पर पानी का ठहराव कम से कम समय के लिए हो।
बारिश और जलस्तर की सटीक जानकारी के लिए इस बार पश्चिम रेलवे ने अत्याधुनिक उपकरणों का सहारा लिया है। नेटवर्क पर 6 स्वचालित रेन वॉटर मेजरिंग मशीनें और 40 अलग-अलग स्थानों पर जलस्तर मापने वाले सेंसर लगाए गए हैं। पुलों के नीचे पानी के स्तर पर नजर रखने के लिए चार विशेष निगरानी प्रणालियां स्थापित की गई हैं। जैसे ही जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंचेगा, यह सिस्टम कंट्रोल रूम को तुरंत ऑटोमैटिक अलर्ट भेजेगा, जिससे समय रहते ट्रेनों की आवाजाही और सुरक्षा पर उचित निर्णय लिया जा सकेगा।