

Mumbai AQI Level 242: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की आबोहवा एक बार फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जिससे महानगर एक 'गैस चैंबर' में तब्दील होता नजर आ रहा है। शुक्रवार की सुबह मुंबईवासियों का स्वागत धुंध और स्मॉग की एक मोटी सफेद चादर के साथ हुआ, जिसने पूरे शहर की विजिबिलिटी (दृश्यता) को काफी कम कर दिया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार सुबह मुंबई का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़कर 242 पर पहुंच गया है, जिसे 'गभीर' श्रेणी में माना जाता है। सुबह 8 बजे के करीब शहर का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन हवा की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कत और आंखों में जलन महसूस हुई।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले वीकेंड यानी शनिवार और रविवार को मुंबई का अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है, जो प्रदूषण की स्थिति को और अधिक गंभीर बना सकता है। फिलहाल शहर में हवा की गति मात्र 3 से 5 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो प्रदूषकों को वातावरण में स्थिर कर रही है। दोपहर के समय ह्यूमिडिटी (आर्द्रता) का स्तर 64% से 83% के बीच रहने की संभावना है, जिससे उमस और प्रदूषण का मिला-जुला असर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक साबित होगा। शहर के विभिन्न हिस्सों में पीएम स्तर में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
मुंबई के अलग-अलग उपनगरों में वायु गुणवत्ता की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, नवी मुंबई में AQI सबसे अधिक 267 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद असुरक्षित है। इसके अलावा मलाड वेस्ट में 240, बीकेसी (बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स) में 234 और चेंबूर में 230 का स्तर मापा गया। आवासीय क्षेत्रों जैसे कांदिवली ईस्ट (218) और कुर्ला (212) में भी हवा जहरीली बनी हुई है। कोलाबा और महालक्ष्मी जैसे तटीय क्षेत्रों में भी AQI 200 के करीब पहुंच गया है। इन इलाकों में सुबह टहलने निकले वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मुंबई की हवा में सूक्ष्म कणों यानी पीएम2.5 (PM2.5) का कंसंट्रेशन बढ़कर 175 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया है, जो सामान्य से कई गुना अधिक है। इसी तरह पीएम10 का स्तर भी 204 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। इतना ही नहीं, वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड का लेवल 227 पार्ट्स प्रति बिलियन मापा गया है, जो फेफड़ों और हृदय रोगों से ग्रस्त मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक हवा की गति में सुधार नहीं होता, तब तक ये प्रदूषक सतह के पास ही जमे रहेंगे, जिससे स्मॉग की स्थिति बनी रहेगी।
मुंबई में वायु गुणवत्ता खराब होने के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। शहर भर में बड़े पैमाने पर चल रहे बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स, मेट्रो निर्माण और निजी इमारतों के पुनर्विकास से उड़ने वाली धूल ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। इसके अलावा, भारी वाहनों से निकलने वाला धुआं और औद्योगिक इकाइयों का उत्सर्जन भी हवा को जहरीला बना रहा है। इस मुद्दे पर पहले भी बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी और राज्य सरकार की अन्य एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई है, लेकिन निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपायों का कड़ाई से पालन न होना प्रशासन की बड़ी विफलता के रूप में सामने आया है।