रेलवे का स्क्रैप (सोर्स: सोशल मीडिया)
Western Railway Scrap Sale: भारतीय रेलवे का पश्चिम क्षेत्र (Western Railway) इन दिनों न केवल अपनी ट्रेनों की रफ्तार बल्कि अपनी वित्तीय उपलब्धियों के कारण भी चर्चा में है। ‘मिशन जीरो स्क्रैप’ अभियान के तहत पश्चिम रेलवे ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में कबाड़ (स्क्रैप) बेचकर ₹500 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) विनीत अभिषेक द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, 17 फरवरी 2026 तक रेलवे ने कुल 506.63 करोड़ की स्क्रैप बिक्री दर्ज की है। गौरतलब है कि रेलवे बोर्ड ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 470 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया था। पश्चिम रेलवे ने न केवल इस लक्ष्य को समय से पहले हासिल किया, बल्कि पिछले साल की तुलना में अपनी दक्षता में भी सुधार किया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वित्तीय वर्ष (2024–25) में पश्चिम रेलवे ने 500 करोड़ रुपए की कमाई का यह पड़ाव 21 मार्च 2025 को छुआ था। इस बार यह उपलब्धि 5 सप्ताह पहले ही हासिल कर ली गई है। यह दर्शाता है कि रेलवे अपने संसाधनों के प्रबंधन और स्वच्छता अभियान को लेकर कितनी गंभीर है।
इस सफलता के पीछे ‘मिशन जीरो स्क्रैप’ की अहम भूमिका है। इस पहल का उद्देश्य रेलवे के सभी वर्कशॉप, शेड, स्टेशन परिसरों और इकाइयों को कबाड़ मुक्त बनाना है। बेकार पड़े पुराने ट्रैक, कंडम घोषित कोच, वैगन और लोकोमोटिव के साथ-साथ अन्य धातुओं को व्यवस्थित तरीके से चिन्हित कर उनकी ई-नीलामी की गई।
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पश्चिम रेलवे की यह उपलब्धि न केवल राजस्व बढ़ाने में सहायक है, बल्कि इससे रेलवे परिसरों में जगह खाली हुई है और परिचालन सुरक्षा व सौंदर्य में भी सुधार आया है।