‘वर्दी में वीडियो बनाया तो होगी जेल’, महाराष्ट्र पुलिस में अब ‘रील्स’ पर बैन, 51,000 जवानों के लिए नया आदेश
Maharashtra Police Reel Ban: महाराष्ट्र पुलिस के 51,000 जवानों पर यूनिफॉर्म में रील बनाने पर प्रतिबंध। सुरक्षा और अनुशासन के चलते 19 फरवरी को जारी हुआ आदेश। उल्लंघन पर सख्त सजा।
- Written By: अनिल सिंह
Maharashtra Police Reel Ban प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
Police Uniform Social Media Policy: सोशल मीडिया के बढ़ते क्रेज के बीच महाराष्ट्र पुलिस विभाग ने अपने कर्मियों के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। रील बनाने की बढ़ती होड़ और वर्दी की गरिमा को ध्यान में रखते हुए, विभाग के लगभग 51,000 जवानों पर यूनिफॉर्म में सोशल मीडिया वीडियो पोस्ट करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। 19 फरवरी 2026 को जारी इस आधिकारिक आदेश का उद्देश्य पुलिस बल के भीतर अनुशासन बनाए रखना और सुरक्षा जोखिमों को कम करना है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई भी पुलिसकर्मी इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्णय तब लिया गया जब विभाग ने गौर किया कि कई जवान ड्यूटी के दौरान या वर्दी पहनकर लोकप्रिय गानों पर रील, मिनी-व्लॉग और अन्य मनोरंजक वीडियो बना रहे थे। हालांकि, इनमें से कई वीडियो केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाए गए थे, लेकिन विभाग का मानना है कि यह वर्दी के प्रति जनता के सम्मान और पुलिस बल की गंभीरता को प्रभावित करता है। इसके अलावा, तकनीकी और सुरक्षा कारणों ने भी इस प्रतिबंध को अनिवार्य बना दिया है।
सुरक्षा और आधिकारिक गोपनीयता पर बड़ा खतरा
स्पेशल ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर दत्तात्रेय कांबले द्वारा जारी सर्कुलर में सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया वीडियो में अक्सर पुलिस थानों की लोकेशन, संवेदनशील सरकारी दस्तावेज, सरकारी वाहन और हथियारों जैसे आधिकारिक उपकरण अनजाने में कैमरे में कैद हो रहे थे। ऐसी जानकारियों का सार्वजनिक होना रणनीतिक और ऑपरेशनल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। किसी भी आपराधिक तत्व द्वारा इन दृश्यों का दुरुपयोग किया जा सकता है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
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सोशल मीडिया लैब की रहेगी पैनी नजर
प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मुंबई पुलिस की ‘सोशल मीडिया लैब’ को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह यूनिट फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चौबीसों घंटे निगरानी रखेगी। यदि कोई पुलिसकर्मी वर्दी में रील बनाता हुआ पाया जाता है, तो लैब तुरंत उसकी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपेगी। ‘खाकी स्वैग’ जैसे ट्रेंड्स, जो हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हुए थे, अब इस आदेश के बाद पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद है।
विधानसभा में गूंजा मुद्दा और अनुशासन की प्राथमिकता
वर्दी में रील बनाने का मामला केवल विभागीय स्तर तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि महाराष्ट्र विधानसभा में भी कुछ विधायकों द्वारा इसे अनुशासनहीनता बताते हुए उठाया गया था। विधायकों का तर्क था कि पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है, न कि सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर बनना। विभाग ने भी सहमति जताई है कि वर्दी की गरिमा और अनुशासन प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब विभागीय स्तर पर स्पष्ट निर्देश जारी होने के बाद, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पुलिस बल अपनी पेशेवर छवि को बरकरार रखे।
