‘मुस्लिम महिला बनेंगी मुंबई की मेयर’, फडणवीस के बयान पर वारिस पठान का पलटवार, छिड़ा सियासी संग्राम
BMC Elections: मुंबई नगर निगम चुनाव से पहले मेयर पद पर घमासान शुरू। देवेंद्र फडणवीस के 'हिंदू मराठी मेयर' वाले बयान पर AIMIM नेता वारिस पठान ने तीखा हमला बोलते हुए संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया।
- Written By: आकाश मसने
AIMIM नेता वारिस पठान (सोर्स: सोशल मीडिया)
Waris Pathan Statement: मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों की आहट के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में ‘मेयर की कुर्सी’ को लेकर ध्रुवीकरण तेज हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हालिया बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिस पर AIMIM नेता वारिस पठान ने कड़ी आपत्ति जताई है।
धारावी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए वारिस पठान ने मुख्यमंत्री के उस दावे को सीधे चुनौती दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुंबई का मेयर केवल ‘हिंदू मराठी’ ही होगा। पठान ने इसे लोकतंत्र और भारतीय संविधान का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि देश का कानून किसी भी नागरिक को उसकी जाति या धर्म के आधार पर ऊंचे पदों से वंचित नहीं करता।
‘जब राष्ट्रपति मुस्लिम हो सकता है, तो मेयर क्यों नहीं?’
पठान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सवाल किया कि अगर देश में मुस्लिम राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल और मुख्यमंत्री बन सकते हैं, तो मुंबई की मेयर एक मुस्लिम महिला क्यों नहीं बन सकती? उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “हमारा सपना है कि एक दिन कलमा पढ़ने वाली और हिजाब पहनने वाली मुस्लिम बेटी मुंबई की मेयर बने।” उन्होंने फडणवीस को याद दिलाया कि उन्होंने संविधान की शपथ ली है, जो समानता का अधिकार देता है।
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विपक्ष की चुप्पी पर उठाए सवाल
वारिस पठान ने केवल बीजेपी को ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और उद्धव ठाकरे को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम वोटों को अपना हक समझने वाली कांग्रेस इस संवैधानिक मुद्दे पर चुप क्यों है। उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए वारिस पठान ने कहा कि खुद को सेक्युलर कहने वाले दल इस विभाजनकारी राजनीति पर अपनी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे?
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क्या था मुख्यमंत्री का विवादित बयान?
विवाद की जड़ रविवार को हुई एक रैली है, जहां चुनावी शंखनाद करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि मुंबई का मेयर केवल ‘हिंदू मराठी’ ही बनेगा। बीजेपी का यह रुख सीधे तौर पर मराठी कार्ड और हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है।
लोकतंत्र में ‘सत्ता की ठेकेदारी’ पर तंज
पठान ने अंत में कहा कि बीजेपी को मुसलमानों के खान-पान और पहनावे से हमेशा समस्या रही है। उन्होंने साफ किया कि लोकतंत्र में किसी एक धर्म या विशेष वर्ग को सत्ता का ‘ठेकेदार’ नहीं बनाया जा सकता। चुनाव से पहले इस जुबानी जंग ने मुंबई की सियासी सरगर्मी को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
