Shiv Sena Malanggad (सोर्सः सोशल मीडिया)
Shiv Sena Malanggad: अंबरनाथ तहसील तथा कल्याण रेलवे स्टेशन से लगभग पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर ग्रामीण क्षेत्र की एक पहाड़ी पर सूफी हाजी मलंग बाबा की दरगाह स्थित है। यहां हाजी मलंग बाबा का उर्स शुरू है। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी माघ पूर्णिमा के अवसर पर मंगलवार दोपहर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मलंगगढ़ पहुंचे। उन्होंने श्री मलंग मच्छिंद्रनाथ की समाधि पर विधिवत महाआरती की।
ताल-मृदंग की ध्वनि और हरिनाम के जाप के बीच संपन्न हुई इस महाआरती के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया। इस अवसर पर हिंदू मंच के अध्यक्ष दिनेश देशमुख, शिवसेना कल्याण जिला अध्यक्ष गोपाल लांडगे, कल्याण ग्रामीण विधायक राजेश मोरे, कल्याण पूर्व विधानसभा संपर्क प्रमुख महेश गायकवाड़, महानगर प्रमुख राजेंद्र चौधरी सहित बड़ी संख्या में शिवसैनिक उपस्थित थे।
मुस्लिम समाज के साथ-साथ बहुसंख्यक वर्ग के लोग भी पहाड़ पर स्थित इस स्थल के प्रति आस्था रखते हैं। शिवसेना के तत्कालीन जिला प्रमुख धर्मवीर आनंद दिघे ने वर्ष 1984 में श्री मलंग मुक्ति आंदोलन की शुरुआत की थी। उन्होंने यह दावा किया था कि यहां दरगाह नहीं, बल्कि श्री मलंग मच्छिंद्रनाथ की समाधि है। इसके बाद उन्होंने हर वर्ष माघ महीने में हजारों शिवसैनिकों के साथ महाआरती करना प्रारंभ किया।
समाधि पर महाआरती के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस संघर्ष पर अपना स्पष्ट और दृढ़ रुख रखा। उन्होंने कहा, “धर्मवीर आनंद दिघे द्वारा शुरू किया गया संघर्ष आज भी जारी है और हम निश्चित रूप से इसमें सफलता प्राप्त करेंगे।” उनके इस बयान से उपस्थित शिवसैनिकों और हिंदू श्रद्धालुओं में उत्साह का संचार हुआ।
शिंदे ने धर्मवीर आनंद दिघे के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदुत्व, धर्म और अन्याय के विरुद्ध उनका संघर्ष आज भी मार्गदर्शक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार मलंगगढ़ से जुड़े मुद्दों पर दृढ़ है और इस लड़ाई को कानूनी तरीकों से ठोस रुख के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, मलंगगढ़ केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि हिंदू समुदाय की आस्था और पहचान का केंद्र है। इसलिए इस परंपरा को किसी भी तरह से भंग नहीं होने दिया जाएगा।
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तीर्थयात्रा के दौरान शांति, अनुशासन और संयम बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने पुलिस और प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। उपमुख्यमंत्री शिंदे के इस सशक्त बयान से यह स्पष्ट हुआ कि मलंगगढ़ का संघर्ष केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और वैचारिक भी है। यह एक बार फिर धर्मवीर आनंद दिघे के विचारों की विरासत को आगे बढ़ाने के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जब मलंगगढ़ स्थित मच्छिंद्रनाथ मंदिर में आरती के लिए जा रहे थे, तब पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। महाआरती में शामिल होने जा रहे सैकड़ों कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक दिया। भाजपा द्वारा शिवसेना से पहले आरती किए जाने के कारण मलंगगढ़ में पुलिस के सामने कुछ समय के लिए जटिल स्थिति भी उत्पन्न हो गई थी।
(इनपुट: कमर काजी)