‘मातोश्री बुलाकर मंत्री बनाना मेरी सबसे बड़ी भूल थी’, बच्चू कडू के शिंदे गुट में जाने पर भड़के उद्धव ठाकरे
Uddhav Thackeray Bachchu Kadu Shiv Sena Shinde MLC: बच्चू कडू के शिंदे गुट में जाने और एमएलसी बनने पर भड़के उद्धव ठाकरे। मातोश्री में कहा- कडू को मंत्री बनाना मेरी सबसे बड़ी गलती थी।
- Written By: अनिल सिंह
उद्धव ठाकरे और बच्चू कडू (फोटो क्रेडिट-X)
Uddhav Thackeray On Bachchu Kadu: साल 2022 में हुए शिवसेना के ऐतिहासिक विभाजन के बाद से ही महाराष्ट्र में नेताओं के पाला बदलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रहार संगठन के इकलौते और आक्रामक विधायक रहे बच्चू कडू शुरुआत से ही महायुति सरकार के साथ खड़े थे, लेकिन हाल ही में उन्होंने औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे की पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। शिंदे ने भी उन्हें तुरंत विधान परिषद की सीट देकर पुरस्कृत किया। बच्चू कडू के इस कदम से उनके खुद के संगठन ‘प्रहार’ के जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी फैल गई, जिसका सीधा फायदा उद्धव ठाकरे ने उठाया है।
मुंबई स्थित ठाकरे परिवार के निजी आवास ‘मातोश्री’ में शुक्रवार को एक विशेष प्रवेश समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान मराठवाड़ा के प्रहार संगठन के दर्जनों बड़े चेहरों ने बच्चू कडू का साथ छोड़कर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की सदस्यता ले ली। इस अवसर पर विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे, विधायक राहुल पाटिल और सांसद नागेश आष्टीकर भी मंच पर मौजूद थे। नए कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए उद्धव ठाकरे ने बच्चू कडू के राजनीतिक चरित्र पर सीधे शब्दों में प्रहार किया।
“उन्हें घर बुलाकर सम्मान देना मेरी गलती थी”
पार्टी की इस विशेष सभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने बेहद भावुक और आक्रामक अंदाज में कहा, “जब मैं महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री था, तब बच्चू कडू अपनी छोटी सी पार्टी के एकमात्र विधायक थे। इसके बावजूद, मैंने उनके प्रति सम्मान दिखाते हुए उन्हें अपने घर (मातोश्री) बुलाया और महा विकास अघाड़ी सरकार में सीधे राज्य मंत्री (Minister of State) का महत्वपूर्ण पद सौंप दिया। आज मुझे एहसास हो रहा है कि एक अवसरवादी व्यक्ति पर भरोसा करना मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी।”
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लालच के आगे झुके नेता, कार्यकर्ता हमारे साथ
उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि जो लोग केवल सत्ता, मलाई और लालच के पीछे भागते हैं, वे कभी किसी विचारधारा के सगे नहीं हो सकते। उन्होंने शिंदे गुट पर तंज कसते हुए कहा, “जिन्हें विधान परिषद की सीटों और लाल बत्ती का लालच है, वे शौक से जा सकते हैं। मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि भले ही लालची नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हों, लेकिन प्रहार और शिवसेना के वफादार कार्यकर्ता आज भी मजबूती से मेरे और महा विकास अघाड़ी के साथ खड़े हैं।”
MVA सरकार के समय से ही जुड़े थे समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बच्चू कडू हमेशा से अमरावती और विदर्भ क्षेत्र में किसानों और दिव्यांगों के मुद्दों पर आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं। उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें MVA सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन जब एकनाथ शिंदे ने बगावत की, तो बच्चू कडू भी गुवाहाटी जाने वाले विधायकों की सूची में शामिल हो गए थे। अब सीधे शिंदे की शिवसेना का हिस्सा बनने और ठाकरे के तीखे हमले के बाद विदर्भ और मराठवाड़ा की राजनीति में एक नया समीकरण बनता हुआ दिखाई दे रहा है।
