

Maharashtra Voter List Revision: महाराष्ट्र में चुनावी सरगर्मियों के बीच मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और फर्जी नामों को लेकर अक्सर राजनैतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहता है। इसी विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए चुनाव आयोग ने 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) का यह विशेष रोडमैप तैयार किया है। हालांकि, विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने इस प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने की आशंका जताते हुए आयोग के सामने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। विपक्ष के इसी डर को दूर करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने मीडिया के सामने आकर आयोग का पक्ष पूरी तरह स्पष्ट किया।
चोकलिंगम ने आश्वस्त किया कि किसी भी योग्य नागरिक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "यह अभियान मतदाताओं की सहूलियत के लिए है, न कि उनका नाम काटने के लिए। बीएलओ के दौरे के समय यदि कोई नागरिक अपने घर पर मौजूद नहीं मिलता है, तो भी उसका नाम काटा नहीं जाएगा। ऐसे लोग निर्धारित समय-सीमा के बाद भी प्रशासनिक कार्यालयों में जाकर अपना नाम दर्ज या संशोधित करा सकते हैं। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों के कामकाजी लोगों के लिए घर बैठे 'ऑनलाइन सेल्फ-मैपिंग' का डिजिटल विकल्प भी चालू कर दिया गया है।"
केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, इस पूरे अभियान को निम्नलिखित महत्वपूर्ण चरणों में पूरा किया जाएगा:
20 से 29 जून 2026: मतदाता प्रपत्रों (Forms) की छपाई और 1 लाख से अधिक बीएलओ कर्मचारियों का विशेष प्रशिक्षण सत्र।
30 जून से 29 जुलाई 2026: बीएलओ कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर (Door-to-Door) विवरणों का सत्यापन और फॉर्म्स का वितरण व संकलन।
05 अगस्त 2026: महाराष्ट्र की एकीकृत मतदाता सूची के ड्राफ्ट (मसौदे) का आधिकारिक प्रकाशन।
05 अगस्त से 04 सितंबर 2026: आम जनता और राजनैतिक दलों के लिए ड्राफ्ट सूची पर अपनी आपत्तियां और दावे दर्ज कराने की अवधि।
03 अक्टूबर 2026 तक: प्राप्त हुई सभी वैध आपत्तियों और दावों का प्रशासनिक स्तर पर अंतिम निपटारा।
07 अक्टूबर 2026: संपूर्ण महाराष्ट्र के लिए शुद्ध और अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) का भव्य प्रकाशन।
चुनाव कार्यालय ने साफ किया है कि इस पूरे अभियान के दौरान यदि किसी मतदाता के नाम या पते में कोई विसंगति (Anomaly) पाई जाती है, तो बीएलओ द्वारा उन्हें अपने वैध आधिकारिक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, बिजली बिल या पासपोर्ट प्रस्तुत करने का पूरा और पर्याप्त अवसर दिया जाएगा। आयोग का मुख्य फोकस उन वोटर्स पर है जो एक ही नाम से दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में रजिस्टर्ड हैं (डुप्लिकेट वोटर्स) या जो रोजगार और शादियों के कारण दूसरे शहरों या राज्यों में पलायन (Migration) कर चुके हैं। 7 अक्टूबर को आने वाली अंतिम सूची ही आगामी चुनावों का मुख्य आधार बनेगी।