महायुति में मुख्यमंत्री की म्युटिनी! कडू के बयान पर भड़की भाजपा; क्या खुद के चक्रव्यूह में फंस गए फडणवीस?

Bachchu Kadu Statement: महायुति में CM पद को लेकर घमासान तेज! बच्चू कडू के शिंदे ही सर्वश्रेष्ठ CM वाले बयान पर भड़की भाजपा ने उन्हें नौटंकी छाप करार दिया। जानिए क्या फडणवीस बचा पाएंगे गठबंधन?
Chief Minister's Mutiny within the Mahayuti! BJP Outraged over Kadu's Statement; Has Fadnavis Fallen into His Own Trap?
सांकेतिक फाेटो (सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Mahayuti Rift News: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री पद को लेकर महायुति के भीतर घमासान छिड़ गया है। हाल ही में शिंदे सेना में शामिल हुए बच्चू कडू ने दावा किया है कि आज भी जनता एकनाथ शिंदे को ही मुख्यमंत्री देखना चाहती है। कडू के इस बयान पर भाजपा बुरी तरह भड़क गई है और उनके प्रवक्ता ने बच्चू कडू को नौटंकी छाप तक कह डाला है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सहयोगियों की इस आपसी लड़ाई में महाराष्ट्र के चाणक्य देवेंद्र फडणवीस खुद अपने ही बुने चक्रव्यूह में फंसने वाले हैं?

बच्चू कडू का पंप और शिंदे का मौन

हाल ही में बच्चू कडू ने पंढरपूर में विठ्ठल दर्शन के बाद एक ऐसा राजनीतिक बयान दे डाला, जिसने मुंबई से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कडू ने दावा किया कि, अगर आज भी महाराष्ट्र में कोई राजनीतिक सर्वे करा लिया जाए, तो जनता मुख्यमंत्री पद के लिए एकनाथ शिंदे को ही पहली पसंद चुनेगी। शिंदे साहब रात के दो बजे भी आम जनता के लिए अपने दरवाजे खुले रखते हैं। इसलिए सुबह-सुबह भगवान को पानी चढ़ाने के बजाय, हम जनता के बीच जाकर प्रार्थना करेंगे कि शिंदे ही दोबारा मुख्यमंत्री बनें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बच्चू कडू जैसे नेता का शिवसेना में आते ही ऐसा आक्रामक रुख अपनाना और इस पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का रहस्यमयी मौन रहना किसी बड़े गेम प्लान का हिस्सा हो सकता है। क्या शिंदे खुद कडू के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करवा रहे हैं? यह मौन इसी बात का प्रतीक माना जा रहा है।

भाजपा नेता आगबबूला

बच्चू कडू के इस बयान पर भाजपा ने बिना देर किए बेहद तीखा और अपमानजनक पलटवार किया है। भाजपा महाराष्ट्र के प्रदेश प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी ने अमरावती में कडू को नौटंकी छाप तक कह डाला। कुलकर्णी ने सीधे शब्दों में कहा, जिन्हें खुद के निर्वाचन क्षेत्र की नस पहचानना नहीं आया, उन नौटंकी छाप बच्चू कडू को महाराष्ट्र कब से समझ आने लगा? अब चूंकि उन्हें नई नौकरी मिली है, तो अपने मालिक (शिंदे) का गुणगान करना उनके लिए अनिवार्य है। हमारे नेता देवेंद्र फडणवीस की लोकप्रियता तो एक छोटा बच्चा भी बता देगा, लेकिन आपकी नौकरी आपको वो लोकप्रियता देखने नहीं देगी। भाजपा प्रवक्ता का यह बयान साफ झलकाता है कि गठबंधन के भीतर शह और मात का खेल अब मर्यादाओं की सीमा लांघने लगा है।

पवार परिवार की भी है कुर्सी पर नजर

महायुति में केवल शिंदे सेना ही मुख्यमंत्री पद के सपने नहीं बुन रही है। महज कुछ दिन पहले ही अजित पवार के बेटे जय पवार ने भी बारामती में एक बड़ा बयान देकर सनसनी फैलाई थी। जय पवार ने खुलेआम इच्छा जताई थी कि सुनेत्रा पवार को 2029 के चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में उतरना चाहिए।

महायुति के तीनों घटक दलों के भीतर से उठ रही ये आवाजें यह साफ करती हैं कि ऊपरी तौर पर दिखने वाला सब ऑल इज वेल का बोर्ड केवल एक मुखौटा है, अंदर हर कोई एक-दूसरे को पछाड़ने की होड़ में लगा है।

क्या शिकारी खुद शिकार बनने की कगार पर है?

महाराष्ट्र की राजनीति में देवेंद्र फडणवीस को एक कुशल रणनीतिकार माना जाता है, जिन्होंने शिवसेना (उद्धव गुट) और राकांपा (शरद पवार गुट) जैसे मजबूत गढ़ों को ढहाकर महायुति की सरकार बनाई थी। उन्हें विरोधियों को मात देने वाला शिकारी कहा जाने लगा था। लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं, एक तरफ अजीत पवार गुट अपनी महत्वाकांक्षाएं पाले बैठा है। दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे के बच्चू कडू फडणवीस की लोकप्रियता को सीधे चुनौती दे रहे हैं।

बच्चू कडू के शिंदे सेना में आने और इस तरह की बयानबाजी से निश्चित रूप से महायुति के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले देवेंद्र फडणवीस इस अंदरूनी बगावत को शांत कर पाते हैं या फिर सहयोगियों के इस चक्रव्यूह में वे खुद शिकार बन जाते हैं।

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