राज्य के बड़े शहरों से गुजरेगा एक और एक्सप्रेसवे, उत्तर से दक्षिण भारत की दूरी होगी कम
Nitin Gadkari: सूरत से कुर्नूल तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे नाशिक, अहमदनगर और सोलापुर से होकर गुजरेगा, जिससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच दूरी करीब 320 किमी तक कम हो जाएगी।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आंचल लोखंडे
Maharashtra new expressway route (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra New Expressway Route: देश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार कई बड़े ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। आर्थिक राजधानी मुंबई के नजदीक सूरत से दक्षिण भारत के कुर्नूल तक एक नए ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है। यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे सूरत से शुरू होकर नाशिक, अहमदनगर और सोलापुर जैसे महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों से गुजरते हुए कुर्नूल तक पहुंचेगा।
दिल्ली की दूरी होगी कम
नितिन गडकरी के अनुसार, प्रस्तावित सूरत-कुर्नूल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनने के बाद दिल्ली से दक्षिण भारत की दूरी लगभग 320 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। यह मार्ग आगे चलकर दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों जैसे चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि और कन्याकुमारी से भी जुड़ जाएगा।
राज्यसभा में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे न केवल दूरी कम करेगा, बल्कि यात्रा का समय और परिवहन लागत भी घटाएगा। इससे देश के विभिन्न औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों के बीच माल ढुलाई और लोगों की आवाजाही पहले से कहीं ज्यादा तेज और आसान हो जाएगी।
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ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा
उन्होंने बताया कि फिलहाल उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाले कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी ट्रैफिक रहता है। विशेष रूप से पुणे और कोल्हापुर के आसपास अक्सर जाम की स्थिति बनती है। नया हाईवे बनने से इन मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।
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केंद्र सरकार के अनुसार यह परियोजना देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करेगी और व्यापार को गति देगी। ट्रकों के जरिए खाद्य पदार्थ, कच्चा माल और तैयार उत्पाद बाजारों तक जल्दी पहुंच सकेंगे, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे 80 प्रतिशत पूरा
गडकरी ने बताया कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का लगभग 75 से 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यह परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली से मुंबई के बीच सड़क यात्रा करीब 12 घंटे में पूरी की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि यह नया एक्सप्रेसवे देश के सड़क नेटवर्क में बड़ा बदलाव लाएगा और उत्तर से दक्षिण तक यात्रा को अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगा।
