शिवसेना का मिशन 22 जिप-225 पंचायत समिति इलेक्शन, हर मंत्री को दी गई 2 जिलों की जिम्मेदारी
Shiv Sena Election Strategy: शिवसेना ने 22 जिला परिषद और 225 पंचायत समिति चुनावों के लिए मिशन प्लान तैयार किया है, जिसमें एकनाथ शिंदे ने हर मंत्री को दो जिलों की जिम्मेदारी दी।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र
Eknath Shinde (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Political Strategy : आने वाले 22 जिला परिषद और 225 पंचायत समिति चुनावों के लिए शिवसेना ने सत्ता का ‘पावर ब्लूप्रिंट’ तैयार किया है। इसके पहले शिवसेना के मुख्य नेता एकनाथ शिंदे ने बूथ स्तर पर शिवसैनिकों को मतदाता सूची से पूरी तरह अवगत होने एवं नई मतदाता सूची पर नजर रखने का निर्देश दिया है।
संगठन को मज़बूत करना, फंड कंट्रोल और एडमिनिस्ट्रेशन पर असर डालने संबधी आम लोगों की समस्याओं को लेकर जवाबदेही का निर्देश दिया गया। शिवसेना के मुख्य नेता और डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे ने अपने आधिकारिक निवास नंदनवन पर उच्चस्तरीय मीटिंग की।
ऑनलाइन मीटिंग संपन्न
मीटिंग में MP डॉ. श्रीकांत शिंदे, आनंदराव अडसुल, प्रकाश पाटिल, भाऊसाहेब चौधरी, मंत्री गुलाबराव पाटिल, मंत्री दादा भुसे, मंत्री प्रकाश अबितकर, मंत्री प्रताप सरनाईक, मंत्री आशीष जायसवाल, MLA डॉ. मनीषा कायंदे और पूर्व MLA रवींद्र फाटक मौजूद थे। मंत्री उदय सामंत, मंत्री शंभूराज देसाई, मंत्री संजय राठौड़, मंत्री भरतशेठ गोगावले, मंत्री योगेश कदम, मंत्री संजय शिरसाठ और केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव संजय मोरे ने ऑनलाइन मीटिंग में हिस्सा लिया।
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‘संपर्क मंत्री अभियान’ पर जोर
शिवसेना ने अब जिला परिषद व पंचायत समिति चुनावों के लिए बिगुल बजा दिया है। बताया गया कि “संपर्क मंत्री अभियान” सिर्फ़ एक कैंपेन नहीं होगा बल्कि स्थानीय निकायों की सत्ता पर कब्ज़ा करने का एक साफ़ और एग्रेसिव ब्लूप्रिंट होगा। राज्य के 22 जिलों में संगठन को तेज़ी से मज़बूत करने और जिला परिषद और पंचायत समिति पर कंट्रोल पाने का पक्का इरादा कर लिया है। शिवसेना चीफ और डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे ने हर संपर्क मंत्री के कंधों पर दो-दो जिलों की जिम्मेदारी डालकर साफ मैसेज दिया है, “हमें जीतना ही है, वरना कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है।”
तीन मोर्चों पर कड़ी मेहनत के निर्देश
मंगलवार देर रात एकनाथ शिंदे की गाइडेंस में डिप्टी चीफ मिनिस्टर के नंदनवन घर पर चीफ मिनिस्टर्स और ऑफिस बेयरर्स की मीटिंग हुई। पिछले लोकल बॉडी इलेक्शन में शिवसेना ने राज्य में नंबर दो पार्टी के तौर पर मजबूत पोजीशन हासिल की थी। इस कामयाबी की वजह से पार्टी के परफॉर्मेंस को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं, और साथ ही, जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। ऐसे में, आने वाले इलेक्शन में सिर्फ सफलता दोहराने का मौका नहीं हैं, बल्कि इसे अपना दबदबा और मजबूत करने और नंबर एक पोजीशन पर पहुंचने के लिए एक निर्णायक लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है। इसीलिए पार्टी ने इस बार ज्यादा एग्रेसिव, प्लान्ड और टारगेट-ओरिएंटेड स्ट्रैटेजी अपनाने और हर लेवल पर जीत पक्की करने का फैसला किया है।
इन मंत्रियों को जिम्मेदारी
मंत्री गुलाबराव पाटिल को जलगांव और नंदुरबार, उदय सामंत को नासिक और अहमदनगर, योगेश कदम को ठाणे और पालघर, प्रकाश अबिटकर को नांदेड़ और हिंगोली, भरतशेत गोगावले को बीड, आशीष जायसवाल को जालना, प्रताप सरनाइक को अमरावती और अकोला, संजय राठौड़ को यवतमाल और वाशिम, संजय शिरसाट को भंडारा और गोंदिया, प्रतापराव जाधव को नागपुर और वर्धा, शंभूराज देसाई को गढ़चिरौली और चंद्रपुर, दादा भुसे को धुले और बुलढाणा की जिम्मेदारी दी गई है। इन 22 जिलों में ज्यादा से ज्यादा जिला परिषद ग्रुप और पंचायत समिति ग्रुप जीतकर जिला परिषद अध्यक्ष और पंचायत समिति चेयरपर्सन के पदों पर भगवा झंडा फहराने का लक्ष्य रखा गया है।
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सत्ता का ‘पावर ब्लूप्रिंट’ तैयार
मुख्य नेता एकनाथ शिंदे ने संपर्क मंत्रियों को स्पष्ट आदेश दिया कि हर जिले में एक टारगेट तय करके चुनाव की कड़ी तैयारी की जाए, जीत का परसेंटेज बढ़ाया जाए और जीतने की क्षमता वाले उम्मीदवारों को ढूंढकर उन्हें पूरी ताकत दी जाए। साफ कहा गया है कि जिन जिलों में गार्डियन मिनिस्टर हैं, वहां जिला और तालुका लेवल की सरकारी कमेटियों में शिवसेना का रिप्रेजेंटेशन तेजी से बढ़ाया जाए, जिसके लिए लोकल MP, MLA और संपर्क अधिकारियों से सीधा तालमेल किया जाए। इतना ही नहीं, जिन जिलों में नेशनलिस्ट पार्टी (अजीत पवार ग्रुप) या BJP का गार्डियन मिनिस्टर है, वहां भी संगठन बढ़ाने के लिए पूरा जोर लगाया जाय और सरकारी कमेटियों में अपने कार्यकर्ताओं को स्थान दिलाया जाए।
विकास के लिए फंड पर जोर
इसके साथ ही फंडिंग साइड को भी उतना ही मजबूत रखने पर जोर दिया गया है। डिस्ट्रिक्ट प्लानिंग (DPDC) के जरिए जिला प्रमुखों, तालुका प्रमुखों और ब्रांच प्रमुखों को विकास कार्यों के लिए फंड देकर लोकल लेवल पर पकड़ मजबूत करने के निर्देश हैं। एडमिनिस्ट्रेशन पर असर डालने और यह पक्का करने की ज़िम्मेदारी भी साफ़ की गई है कि लोगों के नुमाइंदों और वर्करों को समय-समय पर सहयोग मिले, साथ ही सरकारी स्कीमों का फ़ायदा सीधे ज़मीनी स्तर तक पहुँचाया जाए।
स्पेशल एग्ज़ीक्यूटिव ऑफ़िसर (S.E.O.) नियुक्त करके ऑर्गेनाइज़ेशनल सिस्टम को और ज़्यादा असरदार बनाने पर ज़ोर दिया गया है। इसके साथ ही, BLA लिस्ट को अपडेट रखने और तालुका और असेंबली लेवल पर BLA ट्रेनिंग कैंप लगाकर चुनाव सिस्टम को पूरी तरह तैयार रखने के आदेश दिए गए हैं। शिवसेना अब ऑर्गेनाइज़ेशन, एडमिनिस्ट्रेशन और चुनाव मैनेजमेंट तीनों ही मोर्चों पर तैयारी कर रही है। आने वाले चुनावों में यह कितना असरदार होगा। इस पर पूरे राज्य की नज़र है।
