शिवसेना के महाधिवेशन से ठीक पहले सातारा में फूटा 'लेटर बम', एकनाथ शिंदे गुट में अपनों ने ही खोला मोर्चा

Satara Politics: सातारा में शिंदे गुट को बड़ा झटका! भव्य सम्मेलन से पहले शहर प्रमुख निलेश मोरे ने सहयोगियों संग इस्तीफा दिया। संपर्क प्रमुखों पर गंभीर आरोप लगाते हुए संगठन में मची बड़ी बगावत।
Satara Nilesh More Resignation
एकनाथ शिंदे व सातारा शिवसेना शहर प्रमुख निलेश मोरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Satara Nilesh More Resignation: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के आगामी भव्य सम्मेलन से ठीक पहले सातारा जिले में संगठन को तगड़ा झटका लगा है। सातारा शहर प्रमुख निलेश मोरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसे जिले की राजनीति में एक 'लेटर बम' के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि मोरे के समर्थन में शहर के कई बूथ प्रमुखों ने भी सामूहिक रूप से अपने पदों का त्याग कर दिया है। इस बगावत ने संगठन की अंदरूनी कलह को सार्वजनिक मंच पर ला खड़ा किया है।

संपर्क प्रमुखों पर गंभीर आरोप

निलेश मोरे ने अपने इस्तीफे में पार्टी के संपर्क प्रमुखों की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि दिन-रात जमीन पर पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। मोरे के अनुसार कि कार्यकर्ता मेहनत करते हैं, लेकिन विकास निधि और राजनीतिक श्रेय का लाभ केवल चुनिंदा रिश्तेदारों और करीबियों को दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिला नियोजन समिति से उनका नाम जानबूझकर हटाया गया और निष्ठावान पदाधिकारियों को बार-बार अपमानित किया गया।

निष्ठा शिंदे के प्रति, लेकिन अपमान बर्दाश्त नहीं

शिंदे गुट के नेता निलेश मोरे ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने 'शासन आपके द्वार' और 'लाडकी बहिन योजना' जैसी सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए अपना जीवन झोंक दिया। उन्होंने अपने निजी कार्यालय को जिला संपर्क कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया और 'धर्मवीर' फिल्म के मुफ्त प्रदर्शन से लेकर विशाल स्वास्थ्य शिविरों के जरिए संगठन को मजबूत किया। मोरे ने कहा कि मेरी निष्ठा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के प्रति अंतिम सांस तक रहेगी, लेकिन मौजूदा दमनकारी व्यवस्था में आत्मसम्मान खोकर काम करना अब असंभव है। हालांकि मोरे ने बताया कि शिंदे के आदेश के बाद मैंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है और कहा कि दो दिन बाद मैं पार्टी प्रमुख एकनाथ शिंदे से बात करूंगा और उनके सामने अपनी समस्याएं रखूंगा।

महाधिवेशन से पहले बढ़ी मुश्किलें

पार्टी के बड़े सम्मेलन से ऐन पहले हुआ यह संगठनात्मक विद्रोह शिंदे गुट के लिए बड़ी सिरदर्द साबित हो रहा है। सातारा जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र में सामूहिक इस्तीफों ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर जमीनी स्तर पर असंतोष गहरा है। अब देखना यह होगा कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस 'लेटर बम' से होने वाले नुकसान को कैसे रोकते हैं।

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