Shashikant Shinde On NCP Merger Twist (डिजाइन फोटो)
NCP Merger Twist: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के विलय की चर्चाओं ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब शरद पवार गुट के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। शिंदे ने पार्टी के साप्ताहिक मुखपत्र में अपने लेख के जरिए दावा किया कि अगर विलय की प्रक्रिया पूरी हो जाती, तो पार्टी की पूरी कमान अजित पवार को सौंपने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य की राजनीति अजित पवार के असामयिक निधन के बाद एक संवेदनशील दौर से गुजर रही है। इस खुलासे ने उन अटकलों को हवा दे दी है कि दोनों गुटों के बीच पर्दे के पीछे काफी समय से गंभीर बातचीत चल रही थी।
शशिकांत शिंदे ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि पार्टी को एकजुट रखने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नेतृत्व का यह हस्तांतरण जरूरी माना गया था। उन्होंने लिखा, “विलय के बाद पार्टी की कमान पूरी तरह से अजित दादा को सौंपने का फैसला हमारा ही था। हम चाहते थे कि दादा के नेतृत्व में पूरी ताकत के साथ पार्टी आगे बढ़े।” शिंदे के अनुसार, यह निर्णय शरद पवार के मार्गदर्शन में लिया गया था, ताकि परिवार और पार्टी के भीतर के मतभेदों को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके।
28 जनवरी को हुए विमान हादसे में अजित पवार की मृत्यु के बाद महाराष्ट्र के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
ऐतिहासिक शपथ: अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।
शरद पवार का खुलासा: हाल ही में शरद पवार ने भी 12 फरवरी को संकेत दिया था कि जिस दिन हादसा हुआ, उसी दिन विलय पर कोई बड़ा फैसला होने की उम्मीद थी।
भावुक सुप्रिया सुले: सुप्रिया सुले के बयानों में भी पुरानी कड़वाहटों के बजाय ‘दादा के अधूरे सपनों’ को पूरा करने की बात प्रमुखता से नजर आ रही है।
शशिकांत शिंदे के इस दावे के बाद एनसीपी के दोनों खेमों में बहस छिड़ गई है। विधायक रोहित पवार ने पहले ही दावा किया था कि उनके पास विलय की बातचीत से जुड़े पुख्ता सबूत हैं। हालांकि, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेताओं ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए सबूत सार्वजनिक करने की चुनौती दी थी।
रोहित पवार का कहना है कि “दादा के निधन के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए हम फिलहाल संयम बरत रहे हैं।” अब शिंदे के ताजा बयान ने अजित पवार गुट के नेताओं को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अजित पवार वास्तव में शरद पवार की छत्रछाया में वापस लौटने के लिए पूरी तरह तैयार थे?