Supreme Court का बड़ा फैसला, महाराष्ट्र के सभी निकाय चुनाव नतीजे 21 दिसंबर को ही
Supreme Court ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की 264 नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों की मतगणना 21 दिसंबर से पहले नहीं होगी। हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए सभी नतीजे एकसाथ घोषित करने का निर्देश दिया।
- Written By: अपूर्वा नायक
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Local Body Election: महाराष्ट्र में 264 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव परिणामों को लेकर चल रही अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया कि इन सभी निकाय चुनावों के नतीजे एक साथ 21 दिसंबर को ही घोषित किए जाएंगे।
इस तरह से सर्वोच्च न्यायालय ने मुंबई हाईकोर्ट के नागपुर पीठ के इसी फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि इस तारीख से पहले मतगणना नहीं होगी। मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने सभी नगरपालिका और नगर पंचायत चुनावों के नतीजे 21 दिसंबर को एक साथ घोषित करने का आदेश दिया था।
2 दिसंबर को मतदान संपन्न होने के बाद, यह मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह रुख स्पष्ट किया है कि भले ही मतदान हो चुका है, लेकिन 21 दिसंबर से पहले मतगणना नहीं की जाएगी।
सम्बंधित ख़बरें
Morpankh Vastu Shastra: घर की इन जगहों पर रखें मोर पंख, खुल सकते हैं सुख-समृद्धि के द्वार
सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति पर उठाए सवाल, लाडली बहन योजना के लिए फंड ट्रांसफर पर जताई चिंता
राकां स्थापना दिवस पर नेताओं की जुबानी जंग, तटकरे-भुजबल के बीच मंच से तीखी नोकझोंक
Shukrawar Vrat: शुक्रवार का व्रत कर रहे हैं? वैभव लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जरूर पढ़ें यह कथा
सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं के कारण चुनाव आगे न टले। खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि यदि अगली नियोजित चुनाव किसी कारणवश 20 तारीख को नहीं हो पाते हैं, तो भी पहले हो चुके चुनावों की मतगणना को नहीं रोका जाना चाहिए।”
ये भी पढ़ें :- RBI ने रेपो दर 0.25% घटाई, नई दर 5.25%; आर्थिक वृद्धि अनुमान 7.3%
चुनाव टालने का अधिकार किसी को नहीं
कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि चुनावों का समय 31 जनवरी तक सीमित है और किसी को भी, किसी भी कारण से, चुनाव आगे टालने का अधिकार नहीं है। उच्च न्यायालय ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि नतीजे घोषित करने की तारीख नहीं बदली जाएगी।
