हाईकोर्ट से झटका, अब सुप्रीम कोर्ट में होगी बहस, महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव के आरक्षण पर रार

Maharashtra News: महाराष्ट्र जिला परिषद चुनावों में नए सर्किलवार आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती। नागपुर के अधिवक्ताओं ने सरकार के फैसले को गलत बताया। सुनवाई शुक्रवार को होगी।
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सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra ZP Elections New Reservation Policy: महाराष्ट्र जिला परिषद चुनावों में सर्किलवार आरक्षण के लिए पिछली रोटेशन प्रणाली में बदलाव कर नया आरक्षण तय किया गया है। राष्ट्रपाल पाटिल और प्रकाश इवनाते ने राज्य सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी। याचिकाकर्ताओं ने पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। नये सर्किल के लिए नया आरक्षण जरूरी बताते हुए याचिका खारिज कर दी गई थी।

पिछले महीने जिला परिषद चुनावों के लिए सर्किल संरचना की घोषणा की गई थी। वर्धा और वाशिम जिलों में सर्किल पुनर्गठन को चुनौती देने वाली याचिका को कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। इसके बाद सरकार ने चुनाव अधिसूचना जारी की और सर्किलवार आरक्षण के लिए पारंपरिक सर्किल प्रणाली अपनाने की बजाय नये आरक्षण की घोषणा की।

हाई कोर्ट ने क्यों की याचिका खारिज?

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि 2011 के बाद जनगणना नहीं हुई लेकिन जनसंख्या बढ़ी है और गांवों की सीमाएं बदल गई हैं। कई गांवों को नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में शामिल कर दिया गया, जबकि कुछ ग्राम पंचायतों को सीधे नगर पंचायतों में बदल दिया गया।

इन परिवर्तनों के कारण पुराने सर्किल के अनुसार आरक्षण देना संभव नहीं था, इसलिए सर्किलों का पुनर्गठन और उसके अनुसार आरक्षण निर्धारित करने की आवश्यकता थी। इस कारण नागपुर में सर्किलों की संख्या 58 से घटकर 57 हो गई है।

न्यायालय ने दोहराया

संवैधानिक नियमों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया में न्यायालय का हस्तक्षेप बहुत सीमित है। ऐसा तभी हो सकता है जब संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हो। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता इस मामले में अपने आरोप साबित नहीं कर पाए।

आरक्षण ड्रॉ का इंतजार

जिला परिषद अध्यक्षों के आरक्षण के लिए ड्रॉ निकाले जाने के बाद नागपुर में अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया। अब सबकी नजर सर्किलवार आरक्षण के लिए ड्रॉ पर है। इससे पहले उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय से हरी झंडी मिलने के बाद ही ड्रॉ की घोषणा होने की संभावना है।

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