Sanjay Raut S Jaishankar Resignation (फोटो क्रेडिट-X)
Sanjay Raut S Jaishankar Resignation: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और राष्ट्रीय गौरव को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्ध विराम में पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता को लेकर भारत सरकार पर तीखा हमला बोला है। राउत ने इस स्थिति को भारत के लिए ‘शर्मनाक’ बताते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की है।
संजय राउत के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए उन पर पलटवार किया है। भाजपा ने राउत को “पाकिस्तान की दलाली” बंद करने की नसीहत देते हुए उनके बयानों को भारत की वैश्विक छवि को धूमिल करने वाला बताया है।
संजय राउत ने बुधवार (8 अप्रैल 2026) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में शांति स्थापित करने का श्रेय पाकिस्तान और चीन को मिल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर निशाना साधते हुए कहा, “हम विश्वगुरु होने का दावा करते हैं, लेकिन हमारे पड़ोस में जब युद्ध विराम की बात आती है, तो पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है। यह भारत की विदेश नीति की बड़ी विफलता है।” राउत ने मांग की कि यदि भारत इस कूटनीतिक दौड़ में पिछड़ गया है, तो विदेश मंत्री को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
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भाजपा ने संजय राउत के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “पाकिस्तान का प्रवक्ता” करार दिया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारत का मान बढ़ाया है और राउत जैसे नेता केवल राजनीति चमकाने के लिए दुश्मन देश की तारीफ कर रहे हैं। भाजपा ने ट्वीट और बयानों के जरिए कहा, “संजय राउत को पाकिस्तान की दलाली बंद करनी चाहिए। जब पूरा विश्व भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का सम्मान कर रहा है, तब उद्धव सेना के नेता पाकिस्तान का गुणगान कर रहे हैं।”
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए इस्लामाबाद में बातचीत की खबरें आई थीं। हालांकि, भारत सरकार ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि वह ‘दलाल’ (Broker) नहीं बल्कि ‘मित्र’ की भूमिका निभाता है। एस. जयशंकर ने पहले भी स्पष्ट किया था कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन वह कूटनीति के नाम पर किसी का मोहरा नहीं बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि संजय राउत इस मुद्दे के जरिए केंद्र सरकार की “सॉफ्ट पावर” और पड़ोस नीति पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा इसे देश के अपमान और पाकिस्तान प्रेम से जोड़कर देख रही है।