Bullet Train Project ने पकड़ी रफ्तार, देश की पहली अंडर सी टनल के लिए मशीनों ने संभाला मोर्चा
Under Sea Rail Tunnel: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत देश की पहली 'अंडर सी' रेल टनल का काम तेज। विक्रोली और घनसोली में 350 टन वजनी TBM कटरहेड उतारे गए। जानिए कब शुरू होगा पहला चरण।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: गोरक्ष पोफली
अंडर सी रेल टनल का काम (सोर्स: फाइल फोटो)
Bullet Train Project: आर्थिक राजधानी मुंबई एवं अहमदाबाद के बीच चलने वाली देश की पहली बुलेट ट्रेन के लिए मुंबई में बन रही 21 किमी लंबी भूमिगत सुरंग का काम तेज हो गया है। इसी प्रोजेक्ट के तहत ठाणे जिले की समुद्री खाड़ी में पानी के नीचे बनने वाली 7 किमी लंबी देश की पहली अंडर सी टनेल का काम भी हो रहा है।
अंडरग्राउंड टनेल के लिए 2 टीबीएम का उपयोग किया जा रहा है। दोनों टीबीएम के लिए कटरहेड उतारा जा चुका है। पिछले दिनों 350 टन वजनी कटर हेड को विक्रोली शाफ़्ट में उतारा गया और उतना ही वजनी कटरहेड सावली (घनसोली) में उतारा गया। अब दोनों टीबीएम अंतिम असेम्बलिंग और कमीशनिंग ट्रायल से गुजरेंगी। जुलाई के पहले सप्ताह से ड्राइव शुरू हो जाएगी।
मुंबई-ठाणे से गुजरेगी बुलेट टनेल
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत बीकेसी से ठाणे तक 21 किमी लंबी सुरंग बनाई जा रही है। मुंबई के विक्रोली में टनल बोरिंग मशीन (TBM) के पहले कटरहेड को पिछले सप्ताह सफलतापूर्वक शाफ्ट में उतारा गया था। अब दूसरे कटरहेड को भी दूसरे छोर पर उतारा गया है। 13.6 मीटर व्यास और लगभग 350 टन वजन वाला यह कटरहेड एक ऐसी एकल सुरंग की खुदाई के लिए डिजाइन किया गया है,जिसमें इस हाई-स्पीड कॉरिडोर की अप और डाउन दोनो लाइनें होंगी। का इसमें ठाणे क्रीक के नीचे बनने वाली 7 किलोमीटर लंबी सुरंग भी शामिल है, जो भारत की पहली समुद्र के नीचे रेल सुरंग होगी। प्रत्येक TBM का वजन 3100 टन से अधिक है। ये देश में रेल सुरंग निर्माण के लिए अब तक उपयोग की जाने वाली सबसे बड़ी मशीनें हैं।
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इंजीनियरिंग की अद्भुत मिसाल
बुलेट ट्रेन की सुरंग बनाने में अद्भुत इंजीनियरिंग की मिसाल कायम की जा रही है। 13.6 मीटर व्यास वाला यह कटरहेड इतनी बड़ी सुरंग खोदने में सक्षम है जिसमें हाई-स्पीड कॉरिडोर की अप और डाउन दोनों लाइनें एक ही सुरंग में होंगी। इसका 350 टन वज़न लगभग 250 यात्री कारों (मिड-साइज़ SUV) के बराबर है। यह यूनिट 5 अलग-अलग शिपमेंट में साइट पर पहुंचाई गई, जिन्हें 1,600 किलोग्राम उच्च-परिशुद्धता वेल्डिंग के माध्यम से जोड़ा गया। इस यूनिट में 84 कटर डिस्क, 124 स्क्रेपर तथा 16 बकेट लिप लगाए गए हैं, जो खुदाई के साथ तेजी के साथ मलबा भी हटा देते हैं।
सिस्मोग्राफ का उपयोग
सुरंग निर्माण की सुरक्षित खुदाई तथा आसपास की संरचनाओं की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मॉनिटरिंग उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। इनमें सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स ऑप्टिकल डिस्प्लेसमेंट सेंसर्स या टिल्ट मीटर्स, BRT (बाय रिफ्लेक्ट टारगेट/3D टारगेट), सुरंग की सतह पर सूक्ष्म खिंचाव मापने के लिए स्ट्रेन गेज, और पीक पार्टिकल वेलोसिटी (PPV) या कंपन और भूकंपीय तरंगों की निगरानी के लिए सीस्मोग्राफ शामिल हैं।
2027 तक पहला चरण खोलने की तैयारी
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का गुजरात में पहला चरण 2027 तक शुरू करने की तैयारी है। सूरत से बीलीमोरा के बीच बुलेट ट्रेन को दौड़ाने का प्लान है। जबकि बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र में सात पर्वतीय सुरंगों पर काम चल रहा है। महाराष्ट्र में 21 किमी लंबी सुरंग एवं स्टेशन के लिए 2029 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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हर माह तैयार हो रहा 15 किमी ट्रैक
महाराष्ट्र में सुरंग निर्माण के साथ गुजरात में बुलेट ट्रेन के ट्रैक का काम तेजी से हो रहा है। रोजाना 15 किमी तक का अत्याधुनिक ट्रैक तैयार किया जा रहा है। अत्याधुनिक तकनीक ने काम की गति काफी तेज कर दी है। रेल मंत्री के अनुसार, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को तैयार करने में दुनिया की सबसे बेहतर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
508.17 किमी का रूट
508.17 किमी की दूरी में बुलेट ट्रेन के रूट पर 12 स्टेशन हैं। जिनमें से 8 गुजरात में, 4 स्टेशन महाराष्ट्र में बन रहे हैं। यह रेल कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगा।
