Sanjay Nirupam on Donald Trump (फोटो क्रेडिट-X)
Sanjay Nirupam on Iran Israel Conflict: मुंबई में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भूमिका पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। निरुपम ने वैश्विक संघर्षों के बीच अमेरिका के विरोधाभासी बयानों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ईरान और इजरायल के बीच जिस तरह का भीषण संघर्ष चल रहा है, उसे सुलझाने के बजाय अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व की ओर से आने वाली टिप्पणियाँ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच भारी भ्रम की स्थिति पैदा कर रही हैं।
निरुपम ने ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य गतिविधियों का जिक्र करते हुए स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए हैं। विशेष रूप से ईरान द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग और उसके जवाब में इजरायल की ओर से किए गए घातक हमलों ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। निरुपम के अनुसार, इजरायली सेना द्वारा ईरान के परमाणु-संबंधित प्रतिष्ठानों और पेट्रोलियम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना युद्ध के नए और खतरनाक चरण की ओर इशारा करता है।
Mumbai, Maharashtra: Shiv Sena spokesperson Sanjay Nirupam says, “Donald Trump, the outspoken President of the United States, makes so many statements that it becomes difficult to know which one is true. The reality is that there is intense conflict between Iran and Israel. Both… pic.twitter.com/F7jqJWbzD2 — IANS (@ians_india) April 2, 2026
संजय निरुपम ने अमेरिकी राष्ट्रपति के संचार के तरीकों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “डोनाल्ड ट्रम्प, जो अपनी स्पष्टवादिता के लिए जाने जाते हैं, इतने अधिक और विरोधाभासी बयान देते हैं कि यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा सच है और कौन सा महज दिखावा।” निरुपम का मानना है कि इस तरह की ‘दोहरी बयानबाजी’ से युद्धग्रस्त क्षेत्रों में शांति बहाली की कोशिशों को धक्का लगता है और मित्र देशों के बीच भी अविश्वास पैदा होता है।
ये भी पढ़ें- Pune Rain: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बेमौसम बारिश का तांडव, सड़कों पर जलजमाव से जनजीवन अस्त-व्यस्त
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
शिवसेना प्रवक्ता ने इस बात पर भी जोर दिया कि मध्य पूर्व में पेट्रोलियम ठिकानों पर होने वाले हमलों का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसके संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है। अगर परमाणु ठिकानों या तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रहे, तो यह केवल दो देशों का युद्ध नहीं रहेगा, बल्कि एक वैश्विक संकट में तब्दील हो जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में संजय निरुपम ने दुनिया के शक्तिशाली देशों से अपील की कि वे युद्ध को भड़काने वाले बयानों से बचें। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से शांति और कूटनीति के पक्ष में रहा है। ट्रम्प की फॉरन पॉलिसी की आलोचना करते हुए निरुपम ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थिरता तभी आ सकती है जब नेतृत्व जिम्मेदार और पारदर्शी हो। फिलहाल, मुंबई से लेकर दिल्ली तक, निरुपम के इस बयान ने राजनयिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।