Qatar Delegation Iran: पाकिस्तान के हाथ लगी नाकामी, अब कतर ने संभाली कमान, ईरान पहुंचा डेलिगेशन
Qatar Delegation Iran: कतर ने होर्मुज स्ट्रेट विवाद सुलझाने के लिए अपनी टीम तेहरान भेजी है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशें तेज हो गई हैं। खाड़ी देश ईरान के नए टोल टैक्स का विरोध कर रहे हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
कतर डेलिगेशन पहुंचा ईरान (सोर्स-सोशल मीडिया)
High Level Qatar Delegation Arrives In Tehran: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की कोशिशें जारी हैं। पाकिस्तान के बाद कतर ने अपने मध्यस्थों की एक विशेष टीम तेहरान भेजी है। इसका मुख्य मकसद अमेरिका और ईरान के बीच किसी अहम समझौते का नया रास्ता निकालना है। दुनिया की इस सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन के बंद होने से भारी संकट पैदा हो गया है।
इस अहम जलमार्ग के बंद होने से खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा है। कतर एक ऐसे समझौते पर काम कर रहा है जिससे होर्मुज स्ट्रेट को खोला जाएगा। इसके बदले में अमेरिका ईरान को कुछ कड़े प्रतिबंधों में बहुत बड़ी राहत दे सकता है। प्रस्तावित समझौते में 30 दिनों की बातचीत का एक बड़ा ढांचा भी पूरी तरह शामिल है।
ईरान के टोल टैक्स का कड़ा विरोध
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा है कि अमेरिका ईरान को जहाजों पर टोल टैक्स नहीं लगाने देगा। ईरान ने जहाजों से भारी शुल्क वसूलने के लिए पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी नाम का ढांचा बनाया है। ईरान की इस नई योजना का सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कुवैत ने संयुक्त रूप से बहुत कड़ा विरोध किया है।
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अमेरिकी मीडिया के अनुसार वॉशिंगटन ईरान पर नए सैन्य हमलों के बारे में बहुत गंभीरता से विचार कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने निजी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और व्हाइट हाउस में बैठकें जारी हैं। हालांकि अमेरिका ने अभी तक हमले का कोई भी अंतिम और बहुत बड़ा फैसला पूरी तरह से नहीं लिया है।
पाकिस्तान और चीन की नई भूमिका
कतर से पहले अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में पाकिस्तान मुख्य रूप से भूमिका निभा रहा था। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी इस समय ईरान की राजधानी तेहरान में मौजूद हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस अहम डील में चीन को अपना गारंटर बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है।
ईरान इस समय अमेरिका से तत्काल युद्धविराम और भविष्य में कोई नया हमला न करने की पक्की गारंटी चाहता है। इसके साथ ही तेहरान अपने ऊपर लगे हुए अमेरिकी प्रतिबंधों में भी बहुत बड़ी राहत की मांग कर रहा है। वहीं अमेरिका चाहता है कि ईरान पहले होर्मुज खोले और फिर अपने परमाणु कार्यक्रम पर नया समझौता करे।
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खाड़ी देशों में तेल को लेकर भारी बेचैनी
तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित होने से सभी खाड़ी देशों में अर्थव्यवस्था को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। कई बड़े अरब देशों की मुख्य आय केवल कच्चे तेल के बाहरी निर्यात पर ही निर्भर होती है। लंबे समय तक स्ट्रेट बंद रहने से पूरे मध्य पूर्व के देशों पर बहुत ही गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है।
