

Rohit Pawar Meets Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अन्न और औषध निरीक्षक भर्ती परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। युवा विधायक रोहित पवार ने इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर 27 जुलाई 2026 को अन्न एवं FDA के आयुक्त तुकाराम मुंढे से मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
MPSC द्वारा 22 मार्च 2026 को अन्न और औषध निरीक्षक के पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा संपन्न होने के बाद से ही इसमें बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक होने की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी थीं। रोहित पवार ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि परीक्षा से ठीक दो दिन पहले ही कथित प्रश्नपत्र व्हाट्सएप स्टेटस और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
रोहित पवार द्वारा सौंपे गए पत्र में कुछ बेहद चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। व्हाट्सएप पर वायरल हुए संदेशों और वास्तविक परीक्षा के प्रश्नपत्र के बीच समानता देखी गई है। सोशल मीडिया पर 100 में से 90 प्रश्न मिल गए और मोबाइल के जरिए नकल जैसे दावों वाले संदेशों की बाढ़ आ गई थी। सबसे गंभीर आरोप यह है कि 20 मार्च 2026 को ही, यानी परीक्षा से दो दिन पहले, कुछ उम्मीदवारों के मोबाइल पर प्रश्नपत्र के फोटो भेजे गए थे। कथित तौर पर इन्हीं उम्मीदवारों ने परीक्षा में बहुत ऊंचे अंक प्राप्त किए हैं, जिससे इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं।
विधायक रोहित पवार इस महत्वपूर्ण बैठक में अकेले नहीं थे, उनके साथ बड़ी संख्या में वे प्रतियोगी छात्र भी मौजूद थे, जिनका भविष्य इस परीक्षा के परिणामों पर टिका है। पवार ने आयुक्त तुकाराम मुंढे के साथ इस विषय पर सविस्तर चर्चा की और छात्रों के मन में व्याप्त असुरक्षा की भावना से उन्हें अवगत कराया।
FDA के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि चूंकि यह विषय सीधे तौर पर MPSC आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए इस मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक दस्तावेज और सबूत तुरंत आयोग को सौंप दिए जाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि आयोग इन सबूतों के आधार पर छात्रों के हित में उचित कार्रवाई करेगा।
इस कथित घोटाले ने राज्य के लाखों युवाओं के मन में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं के प्रति अविश्वास पैदा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस मामले की तह तक जाकर दोषियों को सजा दिला पाता है और क्या उन मेहनती छात्रों को न्याय मिलता है जो वर्षों से इन पदों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।